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पानी की कमी में भी घर पर उगाएं ताजी सब्जियां, प्याज के छिलकों से बनाएं पौधों के लिए जैविक खाद
 

पानी की कमी में भी घर पर उगाएं ताजी सब्जियां, प्याज के छिलकों से बनाएं पौधों के लिए जैविक खाद


अगर आप घर में किचन गार्डन बनाने का शौक रखते हैं, लेकिन पानी की कमी के कारण ज्यादा पौधे लगाने से बचते हैं, तो कुछ आसान तरीकों की मदद से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. सही मिट्टी, गमले और सिंचाई के तरीके के साथ कई सब्जियां कम पानी में भी उगाई जा सकती हैं. इतना ही नहीं, किचन से निकलने वाले प्याज के छिलकों जैसे जैविक कचरे को भी पौधों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है.

प्याज के छिलकों को ऐसे बनाएं खाद का हिस्सा

प्याज के छिलकों को फेंकने के बजाय उन्हें सुखाकर पौधों के लिए जैविक सामग्री के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए सबसे पहले छिलकों को साफ करके अच्छी तरह धूप में सुखा लें. पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है.

एक दूसरा तरीका यह है कि सूखे छिलकों को पानी में भिगोकर कुछ समय के लिए छोड़ दें और फिर उस पानी का इस्तेमाल पौधों की मिट्टी में किया जा सकता है. हालांकि, केवल प्याज के छिलकों को संपूर्ण खाद नहीं माना जाना चाहिए. अच्छी कंपोस्ट तैयार करने के लिए इसमें सूखे पत्ते, सब्जियों के जैविक अवशेष और अन्य कंपोस्ट सामग्री मिलाकर उन्हें अच्छी तरह सड़ाना बेहतर रहता है.

ताजे या सड़े हुए प्याज के छिलकों को बहुत ज्यादा मात्रा में सीधे गमले की मिट्टी में डालने से बचना चाहिए.

कम पानी में उग सकती हैं ये सब्जियां

पानी की बचत के लिए किचन गार्डन में ऐसी सब्जियों का चुनाव किया जा सकता है, जिन्हें स्थानीय मौसम और सही मिट्टी में अपेक्षाकृत कम सिंचाई की जरूरत होती है. मूली, गाजर और चुकंदर जैसी जड़ वाली सब्जियों के साथ कुछ पत्तेदार सब्जियां भी घर में उगाई जा सकती हैं.

हालांकि, किसी भी पौधे की पानी की जरूरत मौसम, मिट्टी, गमले के आकार और पौधे की अवस्था पर निर्भर करती है. इसलिए कम पानी वाली सब्जियों का मतलब यह नहीं है कि उन्हें पानी की जरूरत ही नहीं होती.

गमले की मिट्टी पर दें खास ध्यान

कम पानी में पौधे उगाने के लिए मिट्टी का सही मिश्रण बेहद जरूरी है. मिट्टी में अच्छी तरह तैयार जैविक कंपोस्ट मिलाने से उसकी संरचना और नमी बनाए रखने की क्षमता बेहतर हो सकती है.

गमले में जल निकासी के लिए पर्याप्त छेद भी होने चाहिए. इससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है और जड़ों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से होने वाली समस्या से बचने में मदद मिलती है.

सुबह या शाम करें पौधों की सिंचाई

पानी बचाने के लिए पौधों को तेज धूप के दौरान पानी देने से बचना बेहतर हो सकता है. सुबह या शाम के समय सिंचाई करने से पानी के जल्दी वाष्पित होने की संभावना कम रहती है.

मिट्टी की ऊपरी परत को देखकर भी पानी देने का फैसला किया जा सकता है. अगर ऊपर की मिट्टी सूखी दिखाई दे रही है, तो पौधे की जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. हर पौधे को रोज एक जैसी मात्रा में पानी देना जरूरी नहीं होता.

मल्चिंग से मिट्टी में बनी रहेगी नमी

पौधों के आसपास सूखी पत्तियों या अन्य उपयुक्त जैविक मल्च की हल्की परत बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है. इससे धूप के सीधे संपर्क में आने वाली मिट्टी से पानी के वाष्पीकरण को कम किया जा सकता है.

हालांकि, मल्च को पौधे के तने से थोड़ा दूर रखना चाहिए और जरूरत से ज्यादा मोटी परत नहीं बिछानी चाहिए.

किचन वेस्ट से गार्डन को बनाएं ज्यादा टिकाऊ

किचन गार्डन में प्याज के छिलके, सूखे पत्ते और अन्य जैविक अवशेषों का सही तरीके से इस्तेमाल करने से घर के कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है. वहीं पानी की जरूरत को समझकर सिंचाई करने, सही पौधों का चुनाव करने और मिट्टी में जैविक पदार्थ मिलाने से गार्डन की देखभाल भी आसान हो सकती है.

इस तरह थोड़ी योजना और सही तरीकों के साथ पानी की कमी के बावजूद घर में छोटा और उपयोगी किचन गार्डन तैयार किया जा सकता है.
 

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