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थाली से गायब हुई हरी सब्जियां! प्याज 80 रुपये तो नींबू 700 पार, जानिए क्यों अचानक इतने बढ़ गए दाम

थाली से गायब हुई हरी सब्जियां! प्याज 80 रुपये तो नींबू 700 पार, जानिए क्यों अचानक इतने बढ़ गए दाम

त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ समय से सब्जियों के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। बीते एक महीने में कई सब्जियों की कीमतों में करीब 40 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। वहीं, फलों के बढ़ते दाम भी लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।सब्जियों और फलों की महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। कई परिवार अब जरूरत के हिसाब से सब्जियां खरीद रहे हैं और दूसरे खर्चों में भी कटौती करने को मजबूर हैं।

आलू-प्याज से लेकर हरी सब्जियों तक महंगाई

दिल्ली के बाजारों में रोजाना इस्तेमाल होने वाली सब्जियां भी अब आम आदमी के बजट को प्रभावित कर रही हैं। आलू-प्याज के दाम बढ़ने के साथ-साथ टमाटर, अदरक, लहसुन और हरी सब्जियों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है।

सब्जी विक्रेताओं के मुताबिक, खुदरा बाजार में टमाटर करीब 40 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। कुछ समय पहले तक 30 से 40 रुपये किलो के आसपास मिलने वाला प्याज अब कई जगहों पर 75 से 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं, अदरक का भाव करीब 240 रुपये किलो बताया जा रहा है।

थोक और खुदरा बाजार में कितना अंतर?

मंडी और खुदरा बाजार के भाव में भी काफी अंतर देखने को मिल रहा है। उपलब्ध बाजार भाव के मुताबिक, थोक में करीब 12 रुपये किलो बिकने वाला आलू खुदरा बाजार में पहुंचकर लगभग 20 रुपये किलो हो रहा है।

इसी तरह प्याज का थोक भाव करीब 36 से 45 रुपये किलो बताया जा रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसके लिए 75 से 80 रुपये किलो तक चुकाने पड़ रहे हैं। टमाटर थोक में करीब 23 से 25 रुपये किलो है, लेकिन खुदरा बाजार में 40 से 60 रुपये किलो तक बिक रहा है।

बीन्स की थोक कीमत करीब 28 रुपये किलो बताई जा रही है, जबकि खुदरा में यह 50 से 60 रुपये किलो तक पहुंच रही है। बैंगन थोक में करीब 20 रुपये किलो है, लेकिन खुदरा बाजार में 40 से 60 रुपये किलो तक बिक रहा है।

पत्ता गोभी का थोक भाव करीब 15 रुपये किलो है, जबकि खुदरा में इसकी कीमत करीब 40 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं, फूलगोभी थोक में करीब 30 रुपये किलो से खुदरा बाजार में 60 से 80 रुपये किलो तक बिक रही है।

बारिश और खराब मौसम को बताया जा रहा वजह

मंडी से जुड़े विक्रेताओं का कहना है कि सब्जियों की बढ़ती कीमतों के पीछे खराब मौसम और बारिश बड़ी वजह हैं। बारिश के कारण कई इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचा है और सब्जियों की सप्लाई भी प्रभावित हुई है।

हरी सब्जियों की मंडियों में आवक कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा त्योहारों के दौरान सब्जियों और दूसरी खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।

बाजार में सस्ती सब्जी ढूंढना हुआ मुश्किल

बढ़ती कीमतों के बीच बाजार में खरीदारी करने पहुंच रहे लोगों का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई सब्जी नहीं दिख रही, जिसकी कीमत सामान्य हो। सीजनल सब्जियों की आवक शुरू होने के बावजूद फूलगोभी करीब 60 से 80 रुपये किलो तक बिक रही है।

सरसों और पालक जैसे साग भी 100 रुपये किलो से ज्यादा कीमत पर बिकने की बात कही जा रही है। वहीं, नींबू के दाम सबसे ज्यादा चौंकाने वाले हैं। बाजार में इसकी कीमत करीब 500 से 700 रुपये किलो तक बताई जा रही है। हरी धनिया भी करीब 350 रुपये किलो के आसपास पहुंच गई है।

सब्जियों के लगातार बढ़ते दामों ने आम परिवारों के रसोई बजट पर सीधा असर डाला है। अब लोगों को त्योहारों की खरीदारी के साथ-साथ रोजमर्रा की सब्जियों के लिए भी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

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