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चीनी की कीमतों पर सरकार का बड़ा एक्शन, निर्यात पर रोक से आम लोगों को राहत

चीनी की कीमतों पर सरकार का बड़ा एक्शन, निर्यात पर रोक से आम लोगों को राहत

देश में बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है ताकि घरेलू बाजार में इसकी कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। माना जा रहा है कि इस कदम से आने वाले समय में देश में चीनी की कीमतों में तेजी पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। देश में हर साल बड़ी मात्रा में चीनी का उत्पादन होता है और इसका निर्यात भी कई देशों में किया जाता है। हालांकि हाल के दिनों में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी। इसी को देखते हुए सरकार ने निर्यात पर सख्ती दिखाते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार चीनी उत्पादन में गिरावट और घरेलू मांग बढ़ने की वजह से बाजार में कीमतों पर दबाव बन रहा था। त्योहारों और गर्मी के मौसम में चीनी की खपत सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक रहती है। ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा निर्यात के कारण देश में चीनी की उपलब्धता कम हो और कीमतें बढ़ जाएं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। यदि निर्यात जारी रहता, तो बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती थी और चीनी के दाम तेजी से बढ़ सकते थे। निर्यात रोकने से अब घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बना रहेगा, जिससे कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

चीनी उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर चीनी का निर्यात किया है। लेकिन इस बार मौसम और उत्पादन को लेकर कुछ चुनौतियां सामने आई हैं। खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्पादन पर असर पड़ने की खबरें आई थीं। इसी वजह से सरकार ने पहले घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने का फैसला किया।

हालांकि निर्यात पर रोक का असर चीनी मिलों और निर्यात कारोबार से जुड़े उद्योगों पर पड़ सकता है। कई कंपनियां वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी की मजबूत मांग का फायदा उठा रही थीं। लेकिन सरकार का मानना है कि घरेलू उपभोक्ताओं के हित सबसे पहले हैं और कीमतों को नियंत्रण में रखना जरूरी है।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर घरेलू बाजार में चीनी की कीमत स्थिर रहती है, तो इसका असर मिठाई, कोल्ड ड्रिंक और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ेगा।

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