Gold ETF ने दिया 35% का धमाकेदार रिटर्न! जानिए सिर्फ ₹100 से सोने में निवेश का सबसे सुरक्षित और आसान तरीका
सोने की कीमतों में तेजी के बीच निवेशकों का रुझान गोल्ड ETF की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगस्त में गोल्ड ETF में ₹2,596 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा ₹1,558 करोड़ था। यानी एक महीने में गोल्ड ETF में निवेश काफी बढ़ा।पिछले एक साल में गोल्ड ETF ने 35% से ज्यादा रिटर्न दिया है। सोने की कीमतों में आगे भी तेजी की संभावना को देखते हुए निवेशकों की दिलचस्पी इस विकल्प में बनी हुई है।
जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटजी हेड क्रिस वुड ने भी सोने की कीमतों में आगे तेजी की संभावना जताई है। हालांकि, किसी भी निवेश में बाजार जोखिम बना रहता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
क्या होता है Gold ETF?
Gold ETF यानी गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड ऐसा निवेश विकल्प है, जिसकी कीमत सोने के बाजार भाव से जुड़ी होती है। इसे शेयरों की तरह BSE और NSE पर खरीदा और बेचा जा सकता है।
इसमें आपको घर पर रखने के लिए सोना नहीं मिलता। इसके बजाय आप सोने से जुड़े ETF यूनिट खरीदते हैं। जब आप इन्हें बेचते हैं, तो बिक्री के समय के बाजार मूल्य के आधार पर आपको रकम मिलती है।
Gold ETF में कैसे करें निवेश?
गोल्ड ETF में निवेश करने के लिए आम तौर पर डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। अपने ब्रोकर के जरिए आप NSE या BSE पर उपलब्ध गोल्ड ETF की यूनिट खरीद सकते हैं।
ऑर्डर पूरा होने के बाद खरीदी गई यूनिट आपके डीमैट अकाउंट में जमा हो जाती हैं। बाद में इन्हें शेयरों की तरह ही स्टॉक एक्सचेंज पर बेचा जा सकता है।
कितना पैसा सोने में लगाना चाहिए?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने को पूरे निवेश पोर्टफोलियो का एक हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसमें बहुत ज्यादा पैसा लगाना जरूरी नहीं है।
आम तौर पर कुल पोर्टफोलियो का करीब 10 से 15% हिस्सा सोने जैसे एसेट में रखने की सलाह दी जाती है। बाजार में उतार-चढ़ाव या आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोना पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, Gold ETF में निवेश करने से पहले रिटर्न की गारंटी नहीं होती, इसलिए निवेश का फैसला अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।

