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अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद वैश्विक बाजारों में उछाल, वीडियो में जाने कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद वैश्विक बाजारों में उछाल, वीडियो में जाने कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर हुए समझौते की खबर ने वैश्विक बाजारों में बड़ा असर डाला है। इस डील की पुष्टि के बाद सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली, जबकि कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 4.8% गिरकर 83.18 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। इससे पहले कुछ हफ्तों में इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता में कमी आई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।

समझौते की खबर का असर अमेरिकी शेयर बाजारों में भी साफ दिखाई दिया। वॉल स्ट्रीट पर सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग 650 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। इसके साथ ही S&P 500 इंडेक्स में करीब 1.5% की तेजी दर्ज की गई, जबकि टेक्नोलॉजी शेयरों पर आधारित नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स 2.3% तक उछल गया।

विश्लेषकों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय तनाव में कमी आने से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और जोखिम लेने की प्रवृत्ति (risk appetite) बढ़ी है। इसी कारण शेयर बाजारों में खरीदारी तेज हुई और सुरक्षित निवेश की ओर रुझान कुछ हद तक कम हुआ।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे आने वाले समय में महंगाई के दबाव में कमी आ सकती है। तेल की कीमतें घटने से ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत भी कम होने की उम्मीद है, जिसका असर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर देखने को मिल सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है और आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कितनी मजबूती से लागू होता है और दोनों देशों के बीच संबंध कितने स्थिर रहते हैं।

फिलहाल इस समझौते ने वैश्विक बाजारों को राहत दी है और निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है। शेयर बाजारों में आई यह तेजी और तेल कीमतों में गिरावट आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

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