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Fuel Export Tax: पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 5 गुना बढ़ा, डीजल पर सरकार ने दी बड़ी राहत

Fuel Export Tax: पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 5 गुना बढ़ा, डीजल पर सरकार ने दी बड़ी राहत

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया है। गुरुवार देर रात जारी फैसले के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स 50 पैसे प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में कटौती की गई है। नई दरें शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं।

सरकार के इस फैसले के तहत पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क पांच गुना बढ़ गया है, जबकि डीजल पर लगने वाला टैक्स 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी डीजल के निर्यात पर 7.50 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है।

पेट्रोल और डीजल पर कितना लगेगा टैक्स?

नई दरों के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर अब 2.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल के निर्यात पर 8.50 रुपये प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स लगेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लागू विंडफॉल टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार ने घरेलू बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों को भी यथावत रखा है। ऐसे में इस फैसले का सीधा संबंध मुख्य रूप से ईंधन के निर्यात पर लगने वाले टैक्स से है।

सरकार क्यों बदलती है विंडफॉल टैक्स की दरें?

विंडफॉल टैक्स की समीक्षा आमतौर पर हर 15 दिन में की जाती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखा जाता है।

भारत में जुलाई 2022 में पहली बार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया गया था। बाद में इसे हटा दिया गया। दी गई जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच इसे दोबारा लागू किया गया था।

इस टैक्स का उद्देश्य तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलने वाले असाधारण मुनाफे पर शुल्क लगाना और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने में मदद करना है।

क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स ऐसा कर है, जो कंपनियों को अचानक होने वाले असाधारण मुनाफे पर लगाया जाता है। युद्ध, वैश्विक संकट या आपूर्ति में कमी के कारण जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तब तेल कंपनियों को निर्यात से ज्यादा कमाई हो सकती है।

ऐसी स्थिति में सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर या उसकी दरों में बदलाव करके घरेलू आपूर्ति और निर्यात के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और असाधारण मुनाफे पर कर लगाने में मदद मिल सकती है।

क्या आम लोगों के लिए पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?

फिलहाल, इस फैसले में घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू शुल्क में बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए केवल निर्यात शुल्क में बदलाव के आधार पर आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। घरेलू पंपों पर कीमतें अन्य लागतों, करों और तेल कंपनियों के फैसलों पर भी निर्भर करती हैं।

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