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Kazakhstan से लेकर Uzbekistan तक, कौन पैदा करता है सबसे सस्ता यूरेनियम? जानिए Global Uranium Market का पूरा खेल
 

Kazakhstan से लेकर Uzbekistan तक, कौन पैदा करता है सबसे सस्ता यूरेनियम? जानिए Global Uranium Market का पूरा खेल


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव की ओर से उन्हें सर्वोच्च राज्य सम्मान दिए जाने के बीच मध्य एशिया की एक और अहम ताकत चर्चा में है—यूरेनियम। परमाणु ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों के बीच यूरेनियम की माइनिंग और न्यूक्लियर फ्यूल सप्लाई चेन का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

इस क्षेत्र में कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान दोनों की भूमिका अहम है। जहां कजाकिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है, वहीं उज्बेकिस्तान भी प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर सबसे कम लागत पर यूरेनियम कौन पैदा करता है और इस पूरी सप्लाई चेन पर किसका दबदबा है?

कजाकिस्तान में यूरेनियम उत्पादन इतना सस्ता क्यों?

कजाकिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश होने के साथ-साथ कम लागत वाले प्रमुख उत्पादकों में भी शामिल है। इसकी सबसे बड़ी वजह In-Situ Recovery (ISR) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल है।

पारंपरिक भूमिगत खनन में बड़ी-बड़ी सुरंगें बनानी पड़ती हैं और भारी मात्रा में चट्टानों को हटाना पड़ता है। इसके मुकाबले ISR तकनीक में यूरेनियम वाले भूमिगत भंडार में विशेष घोल पहुंचाया जाता है। यह घोल यूरेनियम को घोल देता है, जिसके बाद यूरेनियम युक्त तरल को सतह पर पंप करके प्रोसेस किया जाता है।

कजाकिस्तान की 80 फीसदी से ज्यादा यूरेनियम खदानों में इस तकनीक का इस्तेमाल होने का दावा किया जाता है। इससे भारी मशीनरी, बड़े पैमाने पर खुदाई और श्रम की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन लागत भी कम रहती है।

कितना खर्च आता है यूरेनियम निकालने में?

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कजाकिस्तान में यूरेनियम उत्पादन की लागत करीब 25 से 35 डॉलर प्रति पाउंड के बीच रह सकती है। कम श्रम लागत और देश में मौजूद यूरेनियम भंडार की अनुकूल भूगर्भीय परिस्थितियां भी इसे प्रतिस्पर्धी बनाती हैं।

यही वजह है कि कजाकिस्तान ने वैश्विक यूरेनियम माइनिंग मार्केट में मजबूत स्थिति बना ली है।

लेकिन यूरेनियम से परमाणु ईंधन तक का सफर लंबा है

यूरेनियम का खनन न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल का केवल शुरुआती हिस्सा है। खदान से निकले यूरेनियम को प्रोसेस करके आमतौर पर येलोकेक बनाया जाता है। इसके बाद इसे कन्वर्जन और एनरिचमेंट जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, तभी इसका इस्तेमाल कई कमर्शियल परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है।

यहीं पर वैश्विक सप्लाई चेन में रूस की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रूसी सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom के पास दुनिया की यूरेनियम एनरिचमेंट क्षमता का करीब 40-44 फीसदी हिस्सा है।

इसलिए यूरेनियम उत्पादन में कजाकिस्तान का दबदबा होने के बावजूद पूरे न्यूक्लियर फ्यूल मार्केट पर उसका नियंत्रण नहीं है।

यूरेनियम उत्पादन में उज्बेकिस्तान कहां खड़ा है?

उज्बेकिस्तान भी तेजी से महत्वपूर्ण यूरेनियम उत्पादक देश बनकर उभरा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल करीब 3,500 से 4,000 टन यूरेनियम का उत्पादन होता है।

उज्बेकिस्तान के पास दुनिया के बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक है, जिससे लंबे समय में वैश्विक बाजार में उसकी भूमिका और बढ़ सकती है। कजाकिस्तान की तरह उज्बेकिस्तान भी उपयुक्त भंडारों से यूरेनियम निकालने के लिए ISR तकनीक का इस्तेमाल करता है।

इस तकनीक की वजह से पारंपरिक माइनिंग की तुलना में उत्पादन प्रक्रिया ज्यादा लागत-प्रतिस्पर्धी रह सकती है।

दुनिया में सबसे ज्यादा यूरेनियम कौन पैदा करता है?

वैश्विक यूरेनियम उत्पादन में कजाकिस्तान सबसे आगे है। दुनिया के कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 39-41 फीसदी के आसपास बताई जाती है। इसके बाद नामीबिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश प्रमुख उत्पादकों में शामिल हैं।

वहीं उज्बेकिस्तान करीब 6.6 फीसदी वैश्विक हिस्सेदारी के साथ प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है।

Central Asia क्यों बन रहा है यूरेनियम का बड़ा केंद्र?

कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान की मौजूदगी ने मध्य एशिया को वैश्विक यूरेनियम उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्रों में बदल दिया है। दोनों देशों के पास बड़े भंडार हैं और दोनों ही कई क्षेत्रों में ISR जैसी अपेक्षाकृत कम लागत वाली तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

ऐसे समय में जब दुनिया के कई देश परमाणु ऊर्जा को अपने ऊर्जा मिश्रण में ज्यादा जगह देने की कोशिश कर रहे हैं, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे यूरेनियम उत्पादक देशों की रणनीतिक अहमियत आगे और बढ़ सकती है।

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