दुनियाभर में खाद्य पदार्थों की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर पर, वीडियो में जाने UN ने दी महंगाई बढ़ने की चेतावनी
दुनियाभर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। यूनाइटेड नेशंस (UN) से जुड़े फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के अनुसार, वैश्विक फूड कमोडिटी प्राइस इंडेक्स अप्रैल महीने में 1.6% बढ़ गया है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 2.5% अधिक है और पिछले तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।FAO की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य कीमतों में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन और कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में खाद्य संकट और गहरा सकता है।
ईरान युद्ध को अब 10 हफ्ते पूरे हो चुके हैं। इस दौरान मध्य पूर्व का सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग माने जाने वाला हॉर्मुज रूट बंद पड़ा है। यह रास्ता वैश्विक तेल, डीजल और कई रूरी वस्तुओं की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हॉर्मुज रूट बंद होने से डीजल और फर्टिलाइजर यानी खेती में इस्तेमाल होने वाली खाद की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, डीजल और उर्वरकों की कमी का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ रहा है। कई देशों में किसानों को महंगे दामों पर खाद और ईंधन खरीदना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है। इसका असर गेहूं, चावल, मक्का और खाद्य तेल जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देने लगा है।
FAO ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध और समुद्री संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो वैश्विक खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है। खासतौर पर गरीब और विकासशील देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई गई है। कई देशों में पहले से ही खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई नेटवर्क पर गंभीर दबाव बना हुआ है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने परिवहन लागत को भी बढ़ा दिया है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी आ सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने और जरूरी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने की अपील की है। वहीं आम लोगों को आने वाले समय में खाद्य महंगाई का और अधिक सामना करना पड़ सकता है।

