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Farming Update: हरियाणा में धान छोड़ने पर किसानों को ₹8 हजार प्रति एकड़, ड्रिप-स्प्रिंकलर पर 85% सब्सिडी
 

Farming Update: हरियाणा में धान छोड़ने पर किसानों को ₹8 हजार प्रति एकड़, ड्रिप-स्प्रिंकलर पर 85% सब्सिडी

बदलते मौसम और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए हरियाणा सरकार खेती में पानी की खपत कम करने पर जोर दे रही है। राज्य सरकार किसानों को धान के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली दूसरी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि आने वाले समय में कम पानी और सीमित संसाधनों के साथ अधिक उत्पादन वाली खेती पर ध्यान देना जरूरी होगा।
सरकार इसके लिए फसल विविधीकरण के साथ आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। किसानों को धान की जगह वैकल्पिक फसलें अपनाने पर आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।
धान की जगह दूसरी फसल लेने पर ₹8 हजार की मदद
हरियाणा में ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत किसानों को धान की जगह दूसरी फसल लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत वैकल्पिक फसल उगाने या खेत खाली रखने वाले किसानों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जाती है।
सरकार के अनुसार, अब तक 1.59 लाख किसानों को योजना के तहत 166.34 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। किसानों ने करीब 2.34 लाख एकड़ क्षेत्र में धान के बजाय दूसरी फसल अपनाई है। इसका उद्देश्य ज्यादा पानी की जरूरत वाली धान की खेती को कम करके भूजल पर दबाव घटाना है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर पर 85% तक सब्सिडी
पानी की बचत के लिए किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियां अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन तकनीकों पर किसानों को 85 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान है।
इन सिंचाई विधियों में फसल की जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाया जा सकता है। इससे खेत में पानी की अनावश्यक बर्बादी कम करने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा
सरकार धान और गेहूं पर किसानों की अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए दलहन, तिलहन और कम पानी में उगाई जा सकने वाली दूसरी फसलों को बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, बदलते मौसम के बीच टिकाऊ खेती पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसी फसलों और तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, जिनमें पानी और दूसरे संसाधनों की खपत कम हो।
कपास की खेती पर भी फोकस
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित दो दिवसीय रबी कृषि मेले के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने कपास की खेती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कपास राज्य की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है।
मौसम में बदलाव और फसलों पर बढ़ते कीट प्रकोप को देखते हुए कपास की नई किस्मों और बेहतर कृषि तकनीकों पर काम करने की जरूरत है। किसानों को फसल बचाने की तकनीक की जानकारी देने के लिए कपास उत्पादक क्षेत्रों में 257 किसान फील्ड स्कूल लगाए गए हैं। इनके माध्यम से 7,000 से अधिक किसानों को कीट नियंत्रण और कम लागत में खेती से जुड़े तरीके बताए गए हैं।
PM-किसान योजना से भी मिल रही सहायता
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। PM-किसान योजना के तहत हरियाणा के किसानों को अब तक 23 किस्तों में कुल 7,881.60 करोड़ रुपये दिए जाने की जानकारी दी गई है।
सरकार का जोर अब ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें कम पानी और संसाधनों के इस्तेमाल के साथ किसानों की आय और उत्पादन को बनाए रखा जा सके।
 

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