संघर्ष की मिसाल: एक भूल से गंवाए ₹100 करोड़, आज एलन मस्क संग प्राइवेट जेट में सफर करते हैं बुलंदशहर के ये शख्स
जिंदगी में बड़ा नुकसान होने के बाद ज्यादातर लोग टूट जाते हैं। कुछ लोग अपनी किस्मत को कोसते हैं, तो कुछ उसी अफसोस के साथ पूरी जिंदगी गुजार देते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले पुष्पेंद्र सिंह की कहानी इससे बिल्कुल अलग है।
उन्होंने अपनी आंखों के सामने करीब 100 करोड़ रुपये की दौलत खो दी, लेकिन इस सदमे को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जिस नुकसान ने उन्हें अंदर तक हिला दिया था, उसी को उन्होंने अपनी ताकत बना लिया। इसके बाद उन्होंने क्रिप्टो और ब्लॉकचेन की दुनिया में ऐसा मुकाम बनाया कि आज उनका नाम दुनिया के बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स और मंचों पर लिया जाता है।
गांव की साधारण जिंदगी से निकलकर दुनिया के टॉप क्रिप्टो इन्फ्लुएंसर बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
बुलंदशहर के गांव से दिल्ली तक का सफर
पुष्पेंद्र की कहानी बुलंदशहर के खुर्जा के पास बसे एक छोटे से गांव से शुरू होती है। ऐसा गांव जहां आसपास कई किलोमीटर तक कोई डिग्री कॉलेज तक नहीं था। स्कूलों में भी सुविधाओं की कमी थी।
बताया जाता है कि उन्होंने पांचवीं कक्षा में पहली बार अंग्रेजी की ABCD सीखी। हालात मुश्किल थे, लेकिन कुछ अलग करने की चाह बचपन से ही थी।
उन्होंने आगे चलकर BCA और MCA की पढ़ाई पूरी की। उनके पिता फरीदाबाद में मैकेनिकल क्षेत्र में नौकरी करते थे, लेकिन पुष्पेंद्र ने पारंपरिक नौकरी करने के बजाय अपना रास्ता खुद चुनने का फैसला किया।
करीब 2014-15 के दौरान उन्होंने दिल्ली में अपनी IT कंपनी शुरू की और स्कूलों तथा अस्पतालों के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने का काम शुरू किया। कारोबार आगे बढ़ रहा था और उनका सपना था कि विदेशी क्लाइंट्स के साथ काम करके कमाई डॉलर में की जाए।
विदेशी क्लाइंट ने बिटकॉइन में दिया पेमेंट
इसी तलाश के दौरान उन्हें एक विदेशी क्लाइंट मिला। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद पेमेंट की बारी आई तो क्लाइंट ने डॉलर में भुगतान करने के बजाय बिटकॉइन में पेमेंट करने की बात कही।
उस समय बिटकॉइन आज जितना लोकप्रिय नहीं था। पुष्पेंद्र ने इसे सामान्य डिजिटल करेंसी की तरह लिया और भुगतान स्वीकार कर लिया।
क्लाइंट ने एक वॉलेट बनाया और उन्हें उसकी प्राइवेट कीज दीं। करीब 120 बिटकॉइन उनके वॉलेट में ट्रांसफर किए गए। पुष्पेंद्र ने उन कीज को अपने कंप्यूटर के नोटपैड में सेव कर लिया और फिर अपने दूसरे कामों में व्यस्त हो गए।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी बदल दी।
कंप्यूटर फॉर्मेट हुआ और करोड़ों की दौलत गायब
एक दिन उनका Windows सिस्टम करप्ट हो गया। कंप्यूटर को फॉर्मेट करना पड़ा और इसी प्रक्रिया में वह नोटपैड फाइल भी डिलीट हो गई, जिसमें बिटकॉइन की प्राइवेट कीज सेव थीं।
उस समय शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि खोई हुई वह फाइल आने वाले वर्षों में करोड़ों रुपये की दौलत की चाबी बन जाएगी।
कुछ समय बाद बिटकॉइन की कीमत तेजी से बढ़ने लगी। पुष्पेंद्र को अपने पुराने बिटकॉइन याद आए और उन्होंने वॉलेट को दोबारा एक्सेस करने की कोशिश की।
लेकिन बिटकॉइन किसी बैंक की तरह नहीं था, जहां फोन करके पासवर्ड रीसेट कराया जा सके। न कोई कस्टमर केयर था और न ही पासवर्ड भूलने पर आसान रिकवरी का विकल्प।
नतीजा यह हुआ कि उनके पास मौजूद 120 बिटकॉइन तक पहुंच का रास्ता बंद हो गया।
समय के साथ इन बिटकॉइन की कीमत बढ़ती गई और एक वक्त पर उनकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो गई।
यानी दौलत उनके नाम थी, लेकिन वह उसे इस्तेमाल नहीं कर सकते थे।
100 करोड़ का नुकसान बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
इतना बड़ा नुकसान किसी भी इंसान को तोड़ सकता था। लेकिन पुष्पेंद्र ने खुद को संभाला और फैसला किया कि अगर बिटकॉइन वापस नहीं मिल सकता, तो कम से कम उसके बारे में इतना जरूर सीखेंगे कि आगे कभी ऐसी गलती न हो।
उन्होंने ब्लॉकचेन, क्रिप्टोकरेंसी, माइनिंग और डिजिटल वॉलेट की तकनीक को गहराई से समझना शुरू किया।
उनकी यह नई दिलचस्पी परिवार और आसपास के लोगों को बिल्कुल समझ नहीं आई।
छत पर माइनिंग रिग बनाते थे, लोग समझते थे कुछ गलत कर रहे हैं
पुष्पेंद्र ने घर की छत पर क्रिप्टो माइनिंग के लिए रिग तैयार करना शुरू कर दिया। वह लकड़ियां लाते, फ्रेम बनाते और उसमें ग्राफिक्स कार्ड लगाकर माइनिंग सिस्टम तैयार करते।
परिवार के लोग सवाल करते कि MCA करने के बाद आखिर वह यह सब क्यों कर रहे हैं।
रिश्तेदारों को भी उनका काम अजीब लगता था। छत पर लगातार कंप्यूटर और पंखे चलते देखकर कुछ लोगों को शक तक होने लगा कि आखिर यहां हो क्या रहा है।
उस दौर में क्रिप्टो और माइनिंग को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम और डर भी था।
लेकिन पुष्पेंद्र अपने काम में लगे रहे।
हिंदी में क्रिप्टो समझाने का शुरू किया मिशन
उन्होंने YouTube और सोशल मीडिया का सहारा लिया। उनका मकसद था कि जिस तकनीक ने उनकी जिंदगी बदल दी, उसे आम भारतीय भी समझ सके।
उन्होंने हिंदी में ब्लॉकचेन, बिटकॉइन, क्रिप्टो माइनिंग, ग्राफिक्स कार्ड और प्राइवेट कीज जैसे जटिल विषयों को आसान भाषा में समझाना शुरू किया।
धीरे-धीरे उनकी ऑडियंस बढ़ने लगी।
लोग उन्हें सिर्फ क्रिप्टो के बारे में जानकारी देने वाले व्यक्ति के तौर पर नहीं, बल्कि इस नई डिजिटल दुनिया को समझने वाले विशेषज्ञ के रूप में देखने लगे।
बुलरन के साथ बढ़ी लोकप्रियता
2017 और फिर 2021 के क्रिप्टो बुलरन के दौरान क्रिप्टो में लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी। पुष्पेंद्र की ऑडियंस भी लगातार बढ़ती गई।
जिन लोगों ने उनकी बताई रणनीतियों और जानकारी के आधार पर क्रिप्टो में निवेश किया, उनमें से कई लोगों को फायदा हुआ। इससे सोशल मीडिया पर उनका प्रभाव और मजबूत होता गया।
एक छोटे से गांव से निकलने वाला यह लड़का अब अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो कम्युनिटी में पहचान बना चुका था।
FIFA वर्ल्ड कप से लेकर ग्लोबल मंच तक पहुंचा नाम
साल 2022 में FIFA वर्ल्ड कप के दौरान पुष्पेंद्र को कथित तौर पर प्राइवेट जेट से VIP निमंत्रण मिला। इस दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी हस्तियों के साथ मिलने का मौका मिला।
जिस व्यक्ति ने कभी कंप्यूटर में सेव की गई एक फाइल खोकर करोड़ों की दौलत गंवा दी थी, अब वही दुनिया के बड़े मंचों पर क्रिप्टो को लेकर अपनी पहचान बना रहा था।
2025 में बने दुनिया के नंबर-1 क्रिप्टो इन्फ्लुएंसर
पुष्पेंद्र के सफर का सबसे बड़ा पड़ाव साल 2025 में आया। दुनिया के प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज Binance की ओर से ग्लोबल स्तर पर ब्लॉकचेन इन्फ्लुएंसर्स की रैंकिंग और वोटिंग कराई गई।
इसमें पुष्पेंद्र सिंह को ग्लोबल कम्युनिटी के वोट के आधार पर दुनिया का नंबर-1 क्रिप्टो इन्फ्लुएंसर चुने जाने का दावा किया गया।
कभी जिन लोगों को उनका छत पर बैठकर क्रिप्टो माइनिंग करना अजीब लगता था, आज वही उनके सफर पर गर्व करते हैं।
100 करोड़ गंवाने वाला लड़का बना मिसाल
पुष्पेंद्र सिंह की कहानी सिर्फ क्रिप्टो या पैसों की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है जिसमें इंसान अपने सबसे बड़े नुकसान को भी अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल सकता है।
100 करोड़ रुपये की संभावित दौलत तक पहुंच खो देना उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था। लेकिन उन्होंने उस नुकसान के बाद खुद को खत्म नहीं किया, बल्कि उसी घटना को अपनी सीख बनाया।
उनकी कहानी यही बताती है कि कभी-कभी जिंदगी का सबसे बड़ा नुकसान ही आगे बढ़ने की सबसे बड़ी वजह बन जाता है।

