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EPFO New Rules: अब ₹25 हजार तक की सैलरी वालों को मिलेगा EPF का कवर, जानें आपकी सैलरी पर क्या होगा असर
 

EPFO New Rules: अब ₹25 हजार तक की सैलरी वालों को मिलेगा EPF का कवर, जानें आपकी सैलरी पर क्या होगा असर

EPFO New Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े कर्मचारियों के लिए सितंबर 2026 में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया है। यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आ सकते हैं। 


किन कर्मचारियों को मिलेगा नए नियम का फायदा?
नई व्यवस्था का सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से अधिक लेकिन ₹25,000 तक है। ऐसे नए कर्मचारी, जो पहले अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह सकते थे, अब लागू नियमों के तहत EPFO के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में आएंगे। इसके साथ उन्हें EPF, पेंशन और इंश्योरेंस से जुड़े लाभ मिलेंगे। 
EPFO में मिलते हैं तीन बड़े फायदे
EPFO के तहत कर्मचारियों को मुख्य रूप से तीन तरह की सामाजिक सुरक्षा मिलती है।
पहला- EPF: कर्मचारी के रिटायरमेंट के लिए प्रोविडेंट फंड में रकम जमा होती है।
दूसरा- Pension: Employees' Pension Scheme यानी EPS के तहत पात्र कर्मचारियों को नियमों के अनुसार पेंशन का लाभ मिलता है।
तीसरा- Insurance: Employees' Deposit Linked Insurance Scheme यानी EDLI के तहत बीमा कवर मिलता है। 
कर्मचारी और कंपनी का कितना योगदान?
EPF व्यवस्था में सामान्य तौर पर कर्मचारी के वेतन में शामिल Basic + DA के आधार पर 12 फीसदी योगदान का प्रावधान है। नियोक्ता की ओर से भी 12 फीसदी योगदान किया जाता है। हालांकि, नियोक्ता के योगदान का पूरा हिस्सा EPF खाते में नहीं जाता। लागू नियमों के अनुसार इसका एक हिस्सा EPS में जाता है और शेष EPF में जमा होता है।
इसलिए कर्मचारी की सैलरी से वास्तव में कितनी राशि कटेगी और नियोक्ता कितना योगदान करेगा, यह उसके वेतन स्ट्रक्चर और कंपनी में लागू EPFO व्यवस्था पर निर्भर कर सकता है।
अगर Basic Salary ₹25,000 है तो कितना योगदान होगा?
उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की EPF के लिए लागू Basic + DA राशि ₹25,000 है और 12 फीसदी योगदान इसी पूरी राशि पर किया जा रहा है, तो कर्मचारी का योगदान ₹3,000 प्रति माह होगा। नियोक्ता का योगदान भी ₹3,000 होगा, जिसमें लागू नियमों के अनुसार EPS और EPF के बीच हिस्सा निर्धारित होता है।
हालांकि, हर कर्मचारी के लिए वास्तविक योगदान की गणना उसकी कंपनी की EPF व्यवस्था और लागू नियमों के आधार पर देखी जानी चाहिए।


Basic Salary ₹40,000 या ₹50,000 हो तो क्या बदलेगा?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ₹25,000 की नई सीमा का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी जिसकी Basic Salary इससे ज्यादा है, उसकी EPF कटौती अपने आप केवल ₹25,000 पर सीमित हो जाएगी।
अगर किसी कंपनी में कर्मचारी की वास्तविक Basic + DA पर EPF योगदान पहले से किया जा रहा है, तो उस कर्मचारी के योगदान की व्यवस्था अलग हो सकती है। वहीं, यदि नियोक्ता EPF योगदान को निर्धारित वेतन सीमा तक सीमित करता है, तो कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान की गणना उसी सीमा के आधार पर हो सकती है।
इसलिए ₹40,000 या ₹50,000 Basic Salary वाले कर्मचारी पर वास्तविक असर उसकी कंपनी की EPF नीति और लागू वैधानिक प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
नई वेतन सीमा से क्या बदलेगा?
सरकार के अनुसार, नई सीमा का उद्देश्य ज्यादा कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। ₹15,000 की पिछली सीमा सितंबर 2014 में तय की गई थी और अब इसे बढ़ाकर ₹25,000 किया गया है। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO कवरेज में आएंगे। 
ध्यान दें: EPFO में योगदान की वास्तविक राशि Basic Salary, DA, कंपनी की व्यवस्था और लागू EPFO नियमों के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए अपनी सैलरी स्लिप या HR विभाग से योगदान की वास्तविक गणना जरूर जांचें।
 

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