Delhi Traffic: 29 सितंबर से खुलेगा बारापुला फेज-3, ईस्ट दिल्ली से साउथ दिल्ली का सफर होगा आसान
दिल्ली-एनसीआर में रोजाना ट्रैफिक जाम से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। लंबे समय से निर्माणाधीन बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर को 29 सितंबर से आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी है। इसके शुरू होने के बाद पूर्वी दिल्ली और नोएडा से दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
यह कॉरिडोर मयूर विहार फेज-1 को सराय काले खां से जोड़ेगा और आगे मौजूदा बारापुला नेटवर्क के जरिए दक्षिण दिल्ली की ओर जाने का रास्ता आसान करेगा।
29 सितंबर से शुरू होगा ट्रैफिक
करीब एक दशक से इंतजार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा अब यातायात के लिए उपलब्ध होने जा रहा है। बारापुला फेज-3 के शुरू होने के बाद मयूर विहार से सराय काले खां की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
सराय काले खां पर यह कॉरिडोर पहले से मौजूद बारापुला एलिवेटेड रोड से जुड़ जाएगा। इससे पूरे नेटवर्क की लंबाई करीब 9 किलोमीटर तक हो जाएगी।
सफर का समय हो सकता है कम
नए एलिवेटेड स्ट्रेच का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जो रोजाना मयूर विहार, पटपड़गंज, त्रिलोकपुरी और नोएडा की तरफ से दक्षिण दिल्ली की ओर यात्रा करते हैं।
करीब 3.5 किलोमीटर लंबे नए हिस्से के चालू होने से यात्रियों को कई व्यस्त सड़कों और चौराहों से होकर गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। परियोजना से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, मयूर विहार से दक्षिण दिल्ली की ओर सफर का समय पहले के मुकाबले काफी कम हो सकता है।
इससे नियमित यात्रियों के समय के साथ ईंधन की खपत में भी बचत होने की उम्मीद है।
यमुना के ऊपर बना खास ब्रिज
बारापुला फेज-3 परियोजना की एक प्रमुख विशेषता यमुना के बाढ़ क्षेत्र के ऊपर बनाया गया एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज है। इसमें केबल और गर्डर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
इस ब्रिज का स्पैन करीब 125 मीटर बताया गया है। कॉरिडोर में यातायात को सुचारू रखने के लिए कई लूप और कनेक्टिविटी रैंप तैयार किए गए हैं, जिससे मयूर विहार और सराय काले खां की तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को बेहतर कनेक्शन मिल सके।
पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए भी व्यवस्था
परियोजना की एक खास बात यह भी बताई गई है कि इसमें पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए अलग सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसका उद्देश्य केवल वाहनों की आवाजाही को तेज करना ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक और ग्रीन मोबिलिटी को भी बढ़ावा देना है।
प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर ₹1,635 करोड़ हुई
बारापुला फेज-3 परियोजना को 2014 में मंजूरी मिली थी और निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ। जमीन से जुड़े विवाद, पर्यावरणीय मंजूरियों और यमुना क्षेत्र में निर्माण की तकनीकी चुनौतियों के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई।
शुरुआत में परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹1,260 करोड़ थी। निर्माण में देरी और अन्य कारणों के चलते संशोधित लागत बढ़कर करीब ₹1,635 करोड़ हो गई।
दिल्ली के ट्रैफिक पर क्या पड़ेगा असर?
कॉरिडोर के शुरू होने के बाद पूर्वी दिल्ली और नोएडा से दक्षिण दिल्ली जाने वाले वाहनों को एक अतिरिक्त तेज मार्ग मिल सकेगा। इससे मौजूदा प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, वास्तविक ट्रैफिक राहत का असर कॉरिडोर के पूरी तरह संचालन में आने के बाद ही स्पष्ट होगा। परियोजना का उद्देश्य बेहतर कनेक्टिविटी के साथ यात्रा समय, ईंधन खपत और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद करना है।

