Debt Trap: एक EMI चुकाने के लिए न लें दूसरा लोन, वरना बढ़ता जाएगा कर्ज का बोझ
Debt Trap: महीने के खर्च बढ़ने और आय सीमित रहने पर कई लोगों के सामने EMI चुकाने की चुनौती आ जाती है। ऐसी स्थिति में पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेना या क्रेडिट कार्ड से भुगतान करना आसान रास्ता लग सकता है। लेकिन इससे समस्या खत्म होने के बजाय कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है। अगर लगातार कमाई से ज्यादा खर्च होता रहे और लोन की रकम आपकी रीपेमेंट क्षमता से ऊपर चली जाए, तो आप धीरे-धीरे डेट ट्रैप में फंस सकते हैं।
क्या होता है Debt Trap?
डेट ट्रैप उस स्थिति को कहा जाता है, जब व्यक्ति अपने मौजूदा कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए बार-बार नया कर्ज लेने लगता है। शुरुआत में यह तरीका अस्थायी समाधान जैसा नजर आता है, लेकिन हर नए लोन के साथ एक नई EMI जुड़ जाती है।
क्रेडिट कार्ड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है। अगर कार्ड का पूरा बकाया समय पर नहीं चुकाया जाता, तो ब्याज और अन्य शुल्क के कारण बकाया रकम बढ़ सकती है।
एक EMI के बदले बढ़ सकती हैं दो किस्तें
मान लीजिए किसी व्यक्ति की इस महीने EMI चुकाने की तारीख आ गई है, लेकिन सेविंग्स अकाउंट में पर्याप्त पैसा नहीं है। वह EMI भरने के लिए नया पर्सनल लोन लेता है या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है।
इससे मौजूदा EMI तो चुक जाती है, लेकिन नया कर्ज भी चुकाना होगा। अगले महीने से व्यक्ति पर पुरानी EMI के साथ नए लोन की EMI का भी बोझ आ जाएगा। अगर ऐसी स्थिति बार-बार बनती है, तो कुछ समय बाद हर महीने जाने वाली रकम काफी बढ़ सकती है।
बढ़ती EMI से बिगड़ सकता है घरेलू बजट
जब आमदनी का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है, तो रोजमर्रा के जरूरी खर्चों के लिए कम पैसा बचता है। इसका असर घर के बजट पर पड़ सकता है। इसके अलावा बचत और निवेश के लिए भी रकम कम हो जाती है।
ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल जरूरत, घर की मरम्मत या किसी अन्य आकस्मिक खर्च के लिए अलग से पैसा जुटाना मुश्किल हो सकता है। यानी बढ़ता कर्ज सिर्फ वर्तमान बजट को ही नहीं, बल्कि भविष्य की वित्तीय योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है।
डिफॉल्ट होने पर क्रेडिट प्रोफाइल पर असर
अगर EMI का बोझ इतना बढ़ जाए कि व्यक्ति किस्त समय पर न चुका पाए, तो डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ जाता है। भुगतान में देरी या डिफॉल्ट का असर क्रेडिट हिस्ट्री पर पड़ सकता है।
खराब क्रेडिट प्रोफाइल की वजह से भविष्य में नया लोन या क्रेडिट कार्ड हासिल करना मुश्किल हो सकता है। कुछ मामलों में लोन मिलने पर ब्याज दर भी अधिक हो सकती है।
लोन लेने से पहले अपनी क्षमता जरूर देखें
नया लोन लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि मौजूदा EMI और नई EMI को मिलाकर हर महीने कितनी रकम चुकानी होगी। साथ ही जरूरी घरेलू खर्च, बचत और आकस्मिक जरूरतों के लिए पर्याप्त पैसा बच रहा है या नहीं, इसका भी हिसाब करना चाहिए।
सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ मौजूदा EMI चुकाने के लिए लगातार नया कर्ज लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अगर कर्ज का बोझ आय और रीपेमेंट क्षमता से लगातार ज्यादा होता जा रहा है, तो खर्चों की समीक्षा और कर्ज कम करने की योजना बनाना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

