'डीजल पर ₹19 और पेट्रोल पर ₹6...' क्रूड पहले से सस्ता फिर भी क्यों घाटे में है तेल कम्पनियां ? यहाँ समझे पूरा गणित
मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण जब कच्चे तेल की कीमतें ज़्यादा थीं, तब भी भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, जिससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान हुआ। अब, भले ही कच्चे तेल की कीमतें कम हो गई हैं और पहले बढ़ाई गई ईंधन की कीमतें वैसी ही बनी हुई हैं, फिर भी तेल कंपनियों को काफी नुकसान हो रहा है।
ICICI सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में तेल कंपनियों को काफी नुकसान हुआ है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को डीज़ल पर ₹18.9 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹6 प्रति लीटर का नुकसान हुआ है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, पिछले साल इसी तिमाही में तेल और गैस कंपनियों को डीज़ल पर ₹8.2 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹10.3 प्रति लीटर का मार्जिन मिला था। हालांकि, पिछली तिमाही के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा असर रिटेल कीमतों पर नहीं डाला गया, जिससे कंपनियों का मार्जिन नेगेटिव हो गया।
पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कैसे तय होती हैं?
पेट्रोल पंप पर ग्राहकों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत कई चीज़ों से मिलकर बनती है। रिफाइनरी गेट पर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय रिफाइंड ईंधन की कीमत से तय होती हैं। पंप की कीमत तय करने से पहले, तेल कंपनियाँ ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत, ट्रेडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की लागत, डीलर कमीशन और लागू टैक्स जोड़ती हैं।
रिफाइंड ईंधन की लागत में क्या-क्या शामिल होता है?
इसमें रिफाइंड ईंधन की कीमत, ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स, डिस्ट्रीब्यूशन की लागत, डीलर कमीशन, टैक्स और रिटेल मार्जिन जैसी लागतें शामिल होती हैं। इन घटकों में कोई भी बदलाव कंपनियों के मार्जिन पर असर डालता है। जब अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं लेकिन पेट्रोल पंप की कीमतें उसी अनुपात में नहीं बदलतीं, तो तेल कंपनियों का रिटेल प्रॉफिट मार्जिन कम हो जाता है। इसके उलट, अगर ग्लोबल कीमतें गिरती हैं और रिटेल कीमतें वैसी ही रहती हैं, तो कंपनियों को ज़्यादा प्रॉफिट मार्जिन मिलता है।
कंपनियों को नुकसान क्यों हो रहा है?
ICICI सिक्योरिटीज ने हालिया नुकसान के लिए अप्रैल-जून की अवधि के दौरान बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों और स्थिर घरेलू पेट्रोल पंप कीमतों के बीच असंतुलन को ज़िम्मेदार ठहराया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को इस तिमाही में पेट्रोल, डीज़ल, LPG और एविएशन टर्बाइन फ्यूल को बाज़ार दर से कम कीमत पर बेचने से लगभग ₹75,000 करोड़ का नुकसान हुआ।
मौजूदा नुकसान पिछले दो वित्तीय वर्षों में देखे गए मज़बूत रिटेल मार्जिन के मुकाबले भारी गिरावट को दर्शाता है। ICICI सिक्योरिटीज के अनुसार, FY25 की तीसरी तिमाही में पेट्रोल मार्जिन ₹12 प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि FY26 की पहली तिमाही में डीजल मार्जिन ₹8.2 प्रति लीटर तक पहुंच गया।

