CNG Car: अब डिग्गी में नहीं घुसेगा सिलेंडर! डुअल टैंक टेक्नोलॉजी ने बदली तस्वीर, जानें Tata, Maruti और Hyundai का प्लान
भारत में CNG कारों की मांग तेजी से बढ़ी है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में कम रनिंग कॉस्ट और बेहतर माइलेज के कारण बड़ी संख्या में ग्राहक CNG कारों का रुख कर रहे हैं। हालांकि, CNG कार खरीदने वालों के सामने लंबे समय से एक बड़ी परेशानी रही है—बूट स्पेस की कमी।
दरअसल, ज्यादातर पारंपरिक CNG कारों में बड़ा सिलेंडर डिग्गी के अंदर लगाया जाता है। इसकी वजह से सामान रखने के लिए उपलब्ध जगह काफी कम हो जाती है। खासकर परिवार के साथ लंबी यात्रा करने वालों को इसका सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है। अब ऑटो कंपनियां इसी समस्या को दूर करने के लिए डुअल-सिलेंडर और अंडरबॉडी CNG टेक्नोलॉजी पर जोर दे रही हैं।
डुअल-सिलेंडर तकनीक से बदलेगा CNG कार का अनुभव
नई तकनीक में एक बड़े CNG सिलेंडर की जगह दो छोटे सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें कार के निचले हिस्से में इस तरह फिट किया जाता है कि बूट स्पेस को कम से कम नुकसान हो।
इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है। CNG कार होने के बावजूद डिग्गी में रोजमर्रा के सामान के साथ-साथ यात्रा का लगेज रखने के लिए पर्याप्त जगह बची रहती है।
आखिर क्यों खास है अंडरबॉडी CNG तकनीक?
अंडरबॉडी और ट्विन-सिलेंडर सेटअप का सबसे बड़ा फायदा कार की पैकेजिंग और प्रैक्टिकलिटी में दिखाई देता है।
बूट स्पेस: सिलेंडर को डिग्गी में रखने की जरूरत कम होती है।
बेहतर पैकेजिंग: दो छोटे टैंकों को कार के फ्लोर के नीचे व्यवस्थित किया जा सकता है।
लगेज के लिए ज्यादा जगह: परिवार के साथ सफर करने में सुविधा बढ़ती है।
बेहतर उपयोगिता: CNG के कम रनिंग कॉस्ट के साथ कार ज्यादा प्रैक्टिकल बनती है।
स्पेस का बेहतर इस्तेमाल: कार के अंदर उपलब्ध जगह को अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या खत्म हो जाएगी CNG कारों की सबसे बड़ी समस्या?
CNG कारों में अब कंपनियों का फोकस सिर्फ माइलेज बढ़ाने तक सीमित नहीं है। ग्राहक ऐसी कार चाहते हैं जो कम खर्च में चले और पेट्रोल कार जैसी प्रैक्टिकल भी हो।
डुअल-सिलेंडर और अंडरबॉडी CNG सेटअप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अगर यह तकनीक ज्यादा मॉडलों में अपनाई जाती है, तो भविष्य में CNG कार खरीदने वाले ग्राहकों को कम रनिंग कॉस्ट के साथ बेहतर बूट स्पेस भी मिल सकता है।
हालांकि, CNG कार खरीदते समय केवल सिलेंडर की तकनीक को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कार की सुरक्षा, ग्राउंड क्लीयरेंस, बूट क्षमता, CNG टैंक की क्षमता, वारंटी और कंपनी द्वारा दिए गए आधिकारिक स्पेसिफिकेशन को भी जरूर जांचें।
कुल मिलाकर, CNG कारों में डुअल-सिलेंडर और अंडरबॉडी तकनीक ग्राहकों की पुरानी परेशानी का एक बेहतर समाधान बनकर सामने आ रही है। आने वाले समय में यह तकनीक CNG कारों को और ज्यादा प्रैक्टिकल और परिवार के लिए उपयोगी बना सकती है।

