शेयर बाजार में हाहाकार! 4 दिन में निवेशकों के ₹21 लाख करोड़ डूबे, गिरावट की ये हैं 5 बड़ी वजहें
भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी में जारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। महज चार कारोबारी सत्रों में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 21 लाख करोड़ रुपये घट गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। 23 अक्टूबर को सेंसेक्स 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं, पूरे सप्ताह में सेंसेक्स करीब 1,605 अंक टूट गया।आखिर शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आ रही है? क्या आने वाले दिनों में निवेशकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं? आइए जानते हैं बाजार में गिरावट की पांच बड़ी वजहें।
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, रुपये की कीमत और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
2. पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, कूटनीतिक बातचीत में रुकावट और क्षेत्र में संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं से निवेशक सतर्क हो गए हैं।
जब दुनिया में युद्ध या बड़े भू-राजनीतिक संकट का खतरा बढ़ता है, तो निवेशक अक्सर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बिकवाली है। विदेशी निवेशक अक्टूबर में भी भारतीय शेयरों से बड़ी मात्रा में पैसा निकाल रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से शेयरों पर दबाव बढ़ता है और बाजार की तेजी कमजोर पड़ सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला आकर्षक रिटर्न भी विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से पैसा निकालने के लिए प्रेरित कर सकता है।
जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो घरेलू निवेशकों के लिए भी बाजार में तेजी बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
4. रुपये और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है। तेल महंगा होने से भारत को आयात के लिए अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव बन सकता है।
रुपये में कमजोरी आने पर विदेश से कच्चा माल, मशीनरी और अन्य सामान खरीदने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, महंगे तेल से परिवहन और उत्पादन खर्च भी बढ़ने की आशंका रहती है।
निवेशकों को चिंता है कि यदि महंगाई का दबाव बढ़ा, तो इसका असर ब्याज दरों, कंपनियों के मुनाफे और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। इसी आशंका से बाजार में बिकवाली तेज हो सकती है।
5. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी दबाव
शेयर बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिल रही है। कई छोटे और मध्यम आकार के शेयरों में गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
ऐसे शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर ज्यादा होता है। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक इन शेयरों में जोखिम कम करने के लिए तेजी से बिकवाली कर सकते हैं। इसका असर व्यापक बाजार सूचकांकों और निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ता है।
आगे शेयर बाजार की चाल कैसी रह सकती है?
आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। वैश्विक ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, तनाव बढ़ने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहने पर बाजार में दबाव बना रह सकता है।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना जरूरी है। निवेशकों को अपनी निवेश अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
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लंबी अवधि के निवेशक: कंपनियों के कारोबार, वित्तीय स्थिति और वैल्यूएशन का आकलन करें।
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नए निवेशक: केवल बाजार में गिरावट देखकर जल्दबाजी में पैसा न लगाएं।
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शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स: जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें और बिना रणनीति के ट्रेडिंग से बचें।
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एफएंडओ ट्रेडर्स: बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के दौरान लीवरेज और पोजीशन साइज पर विशेष ध्यान दें।
कुल मिलाकर, चार दिनों में करीब 21 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घटने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। फिलहाल बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती महंगे कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से निपटना है। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर इन्हीं संकेतों पर रहेगी।

