शेयर बाजार में हाहाकार! निवेशकों के ₹15,000 करोड़ डूबे, सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट की ये रहीं 5 बड़ी वजहें
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते रहे, जबकि बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) में करीब 15,003 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस कमजोरी का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला, जहां आईटी, बैंकिंग, ऑटो और मेटल शेयरों में दबाव बना रहा।
बाजार खुलते ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। शुरुआती कारोबार में हल्की गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रही। अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर जारी संशय का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
दूसरी बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली मानी जा रही है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाला है। जब बड़े संस्थागत निवेशक बिकवाली करते हैं तो बाजार में दबाव बढ़ जाता है और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई देता है।
तीसरा कारण मुनाफावसूली (Profit Booking) को माना जा रहा है। पिछले कुछ समय में बाजार ने अच्छी तेजी दिखाई थी और कई शेयर रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए थे। ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हो गई।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाले प्रमुख कारण रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक अस्थिर रहती हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी जारी रह सकता है।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, आईटी और धातु कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। हालांकि कुछ रक्षात्मक (Defensive) सेक्टरों में सीमित खरीदारी भी देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित रही।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी साबित हो सकती है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में घबराकर निवेश निकालने के बजाय सोच-समझकर निवेश रणनीति अपनानी चाहिए। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव शेयर बाजार का सामान्य हिस्सा है और केवल दैनिक गिरावट के आधार पर निवेश संबंधी बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें और किसी भी अफवाह या तात्कालिक बाजार भावनाओं के आधार पर निर्णय न लें। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

