Samachar Nama
×

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वीडियो में देंखे ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर तक पहुंचा; आंकड़ों में विरोधाभास पर उठे सवाल

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वीडियो में देंखे ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर तक पहुंचा; आंकड़ों में विरोधाभास पर उठे सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो पिछले चार वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 116 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

तेल कीमतों में इस तेज उतार-चढ़ाव के बीच एजेंसियों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि मौजूदा हालात और ईरान युद्ध जैसे हालात की वजह से देश की तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान के अनुसार, तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

हालांकि, आर्थिक आंकड़े इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के औसत आंकड़ों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें 71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही हैं, जो कोविड काल 2020-21 के बाद सबसे निचला औसत स्तर माना जा रहा है। यह तथ्य बताता है कि पूरे वर्ष के दौरान कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर और कम रही हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान-अमेरिका संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 से मानी जा रही है। इससे पहले 27 फरवरी तक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। यानी युद्ध शुरू होने के बाद सिर्फ दो महीनों में ही कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है।

वहीं दूसरी ओर, सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश की चार प्रमुख तेल कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरुआती नौ महीनों में कुल 1.37 लाख करोड़ रुपये का लाभ कमाया है। इसका औसत लगभग 116 करोड़ रुपये प्रतिदिन बैठता है। यह आंकड़ा तेल कीमतों में गिरावट और स्थिरता के बावजूद कंपनियों की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के मुनाफे को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग आंकड़े वैश्विक बाजार की जटिलता को दर्शाते हैं। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कीमतों में अस्थिरता पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर तेल कंपनियों की कमाई और लाभ के आंकड़े मजबूत बने हुए हैं।

ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि यदि ईरान-अमेरिका तनाव लंबा खिंचता है, तो आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर सीधे तौर पर पड़ेगा।

फिलहाल स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन घरेलू आंकड़े एक अलग आर्थिक तस्वीर पेश कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ऊर्जा बाजार में लाभ और नुकसान का आकलन कई कारकों पर निर्भर करता है।

Share this story

Tags