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सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट! भारत और ग्लोबल मार्केट में नरम पड़े भाव, HSBC ने बदला अपना अनुमान

10 जुलाई को बुलियन से लेकर फ्यूचर्स तक, सभी बाज़ारों में सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। भारतीय बाज़ार में, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम सोने की कीमत ₹800 गिर गई। इस पीली धातु की चमक न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी फीकी पड़ गई है। इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियां मुख्य कारण मानी जा रही हैं।

**कच्चे तेल में उछाल से बिगड़े हालात**

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। इस गतिरोध के कारण वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक और भारी उछाल आया है। जब भी कच्चा तेल महंगा होता है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक - फेडरल रिजर्व - को महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं। अर्थशास्त्र का एक बुनियादी सिद्धांत कहता है कि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों के लिए सोना कम आकर्षक हो जाता है। यही कारण है कि सोना, जिसमें पिछले सप्ताह ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई थी, इस सप्ताह दबाव में आ गया और इसमें कुल 1.4% की गिरावट दर्ज की गई।

**गिरावट के बीच खरीदारी का शानदार मौका?**

बाज़ार के जानकारों के मुताबिक, कीमतों में यह गिरावट निवेशकों के लिए एक मौका हो सकती है। KCM ट्रेड के मुख्य बाज़ार विश्लेषक टिम वॉटरर का कहना है कि 9 जुलाई को आई तेज़ी के बाद बाज़ार अभी 'कंसोलिडेशन' (स्थिरता) के दौर से गुज़र रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिसके कारण ट्रेडर अभी निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं, तो निवेशक इन कम कीमतों पर भारी खरीदारी कर सकते हैं। हालाँकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो महंगाई की आशंका सोने की कीमतों को और नीचे गिरा सकती है। 

**अमेरिकी फेड के सख्त रुख से तनाव बढ़ा**

सोने के निवेशकों के लिए चिंता का एक और कारण अमेरिका से सामने आया है। हाल ही में फेडरल रिजर्व की जून की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) जारी किए गए, जिनसे साफ पता चलता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई के उच्च स्तर को लेकर बहुत चिंतित है। इसका मतलब है कि फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरें घटाने को तैयार नहीं है; इसके बजाय, वह सख्त नीतियां अपना सकता है। अगर ऐसा होता है, तो सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा सकती है। इसके चलते, इंटरनेशनल मार्केट में सोने की स्पॉट कीमत 0.1% गिरकर $4,115.79 प्रति औंस हो गई। वहीं, अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,124.90 प्रति औंस पर आ गए। भारत में भी, MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,44,500 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे हैं, जो 0.55% (₹800) की गिरावट दिखाते हैं।

**HSBC ने अनुमान घटाया**

इन ग्लोबल हालात को देखते हुए, दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में से एक HSBC ने सोने की भविष्य की कीमतों के लिए अपने अनुमान में बदलाव किया है। डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों का हवाला देते हुए, बैंक ने अपने पिछले अनुमानों को काफी कम कर दिया है।

नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के लिए सोने की औसत कीमत अब $4,560 प्रति औंस रहने का अनुमान है, जो पहले के $4,864 के अनुमान से कम है। इसी तरह, 2027 के लिए अनुमान को $5,000 से घटाकर $4,925 प्रति औंस कर दिया गया है। HSBC का मानना ​​है कि साल के बाकी समय में सोने की कीमतें $3,800 से $4,700 प्रति औंस के दायरे में घटती-बढ़ती रहेंगी। हालांकि, यह साल के आखिर तक $4,750 प्रति औंस और अगले साल के आखिर तक $5,025 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

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