Samachar Nama
×

8वें वेतन आयोग से पहले केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग! अब सभी को मिले ‘वन रैंक, वन पेंशन’ का फायदा

8वें वेतन आयोग से पहले केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग! अब सभी को मिले ‘वन रैंक, वन पेंशन’ का फायदा

केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इन दिनों 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच वेतन और पेंशन से जुड़ी एक नई मांग ने चर्चा बढ़ा दी है। कर्मचारी संगठनों की ओर से मांग की जा रही है कि वन रैंक, वन पेंशन यानी OROP जैसी व्यवस्था का दायरा बढ़ाकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों तक किया जाए।

मांग के पीछे तर्क यह है कि अगर दो कर्मचारी एक ही पद या समान लेवल पर समान अवधि तक सेवा करने के बाद रिटायर हुए हैं, तो सिर्फ रिटायरमेंट का साल अलग होने की वजह से उनकी पेंशन में बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए।

क्या है OROP?

वन रैंक, वन पेंशन का मतलब ऐसी व्यवस्था से है जिसमें समान पद और समान सेवा अवधि वाले रिटायर कर्मचारियों की पेंशन को एक समान आधार पर तय करने की कोशिश की जाती है। इसमें कर्मचारी के रिटायर होने का साल पेंशन में अंतर का मुख्य आधार नहीं रहता।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग समय पर रिटायर हुए समान श्रेणी के पेंशनर्स के बीच पेंशन के अंतर को कम करना है।

कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग से क्यों कर रहे हैं मांग?

ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के महासचिव सी. श्रीकुमार ने ईटी वेल्थ ऑनलाइन से बातचीत में कहा कि OROP लागू होने से एक ही पद से अलग-अलग समय पर रिटायर हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन में मौजूद अंतर को खत्म करने में मदद मिल सकती है।

वहीं, ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने भी पेंशन में अंतर का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, पुराने पेंशनर्स को समय-समय पर वेतन आयोगों के जरिए संशोधन का लाभ मिलता रहा है, लेकिन अलग-अलग समय पर रिटायर हुए पेंशनर्स के बीच पेंशन में अंतर अभी भी बना हुआ है।

पहले भी पुराने पेंशनर्स के लिए हुआ है बदलाव

पेंशन में पुराने और नए रिटायर कर्मचारियों के बीच अंतर को कम करने की कोशिश पहले भी वेतन आयोगों के स्तर पर होती रही है।

5वें वेतन आयोग ने 1986 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन को नए वेतनमान के आधार पर दोबारा निर्धारित करने की सिफारिश की थी। इसमें ‘नॉशनल पे फिक्सेशन’ के जरिए पुराने वेतन को नए वेतनमान के अनुरूप मानकर पेंशन की दोबारा गणना का प्रावधान सुझाया गया था।

इसके बाद 7वें वेतन आयोग ने भी पुराने और नए पेंशनर्स के बीच समानता बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा की थी और पेंशन की गणना के लिए ऐसे तरीके सुझाए थे, जिनसे दोनों वर्गों के बीच अंतर कम किया जा सके।

अभी सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू नहीं है OROP

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि OROP फिलहाल सभी केंद्रीय सरकारी सिविल कर्मचारियों के लिए लागू व्यवस्था नहीं है। यह मुख्य रूप से सशस्त्र बलों से जुड़े पेंशनर्स के लिए लागू है और इसकी अपनी अलग नियमावली है।

अब कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग के दौरान इस तरह की समानता वाली व्यवस्था पर विचार किया जाए और इसका लाभ केंद्रीय सरकारी सिविल कर्मचारियों तक भी बढ़ाया जाए।

हालांकि, यह अभी कर्मचारी संगठनों की मांग है। इसे सभी केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू करने का अंतिम फैसला सरकार और संबंधित प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

यानी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आने वाला समय महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वेतन के साथ-साथ पुराने और नए पेंशनर्स के बीच पेंशन के अंतर का मुद्दा भी अब प्रमुख मांगों में शामिल होता दिखाई दे रहा है।

Share this story

Tags