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Bank Strike: 4 दिन तक बैंकिंग सेवाओं पर असर, जानें सरकारी और निजी बैंकों में कितना काम होगा प्रभावित
 

Bank Strike: 4 दिन तक बैंकिंग सेवाओं पर असर, जानें सरकारी और निजी बैंकों में कितना काम होगा प्रभावित

देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर शुक्रवार को हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर बैंक कर्मचारी 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं। हड़ताल के तुरंत बाद दूसरा शनिवार, रविवार और गणेश चतुर्थी की छुट्टी होने के कारण कई जगहों पर बैंक शाखाओं में लगातार चार दिन तक सामान्य कामकाज प्रभावित रहने की स्थिति बन गई है।
इसका सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिन्हें शाखा जाकर नकद लेनदेन, चेक से जुड़े काम, ड्राफ्ट या अन्य बैंकिंग सेवाएं पूरी करनी हैं। कारोबारियों और छोटे उद्योगों के लिए भी लगातार बैंक बंद रहने से भुगतान और दूसरे वित्तीय काम प्रभावित हो सकते हैं।
5 दिन के वर्किंग वीक की मांग पर अड़े बैंक कर्मचारी
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांग सभी शनिवारों को अवकाश घोषित कर 5-दिन का कार्य सप्ताह लागू करना है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस मांग को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के सामने अपनी बात रखते रहे हैं।
मार्च 2024 में हुए 12वें बाइपार्टाइट सेटलमेंट में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच सभी शनिवारों को छुट्टी देने पर सहमति बनने का दावा किया गया था। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम के समय में करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था।
हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अंतिम सरकारी अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण बैंक कर्मचारी अभी भी पुराने अल्टरनेट-सैटरडे सिस्टम के तहत काम कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर यूनियनों ने हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
सरकारी बैंकों पर ज्यादा असर, निजी बैंक खुले
हड़ताल का प्रभाव सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में अलग-अलग दिखाई दे रहा है। SBI, PNB, Bank of Baroda और Canara Bank जैसे सरकारी बैंकों की शाखाओं में कामकाज बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ है। शाखा स्तर पर नकद जमा और निकासी, चेक संबंधी काम, ड्राफ्ट और अन्य सेवाओं पर इसका असर पड़ा है।


वहीं HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसे निजी बैंकों में सामान्य बैंकिंग गतिविधियां काफी हद तक जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि सरकारी बैंकों से जुड़े क्लियरिंग और चेक प्रोसेसिंग पर असर पड़ने से अंतर-बैंक लेनदेन की गति प्रभावित हो सकती है।
UPI और डिजिटल बैंकिंग से ग्राहकों को राहत
बैंक शाखाएं बंद होने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल जारी रह सकता है। UPI, IMPS, NEFT, RTGS और नेट बैंकिंग जैसी सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने से लोग ऑनलाइन पैसे भेजने, बिल भुगतान और अन्य डिजिटल लेनदेन कर सकते हैं।
हालांकि, कुछ इलाकों में एटीएम में नकदी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है। लगातार बैंक अवकाश के कारण कैश की जरूरत वाले ग्राहकों को परेशानी हो सकती है।
हड़ताल करने वाले कर्मचारियों पर वेतन कटौती का असर
हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। बैंकिंग सेवा के नियमों के तहत हड़ताल के दिन के लिए 'नो वर्क, नो पे' का सिद्धांत लागू किया जा सकता है। ऐसे में संबंधित कर्मचारियों के वेतन से हड़ताल के दिन के हिसाब से कटौती हो सकती है।
हड़ताल के दिन की अनुपस्थिति को सामान्य अर्जित या आकस्मिक अवकाश के तौर पर समायोजित करने का लाभ भी आम तौर पर नहीं मिलता। इसके बावजूद यूनियनें अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के पक्ष में हैं।


BRICS Summit के दौरान हड़ताल से बढ़ी चर्चा
बैंक कर्मचारियों की यह हड़ताल ऐसे समय हुई है जब नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। सम्मेलन में विदेशी प्रतिनिधिमंडल और कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं।
सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से हड़ताल टालने के लिए बातचीत और अपील की गई, लेकिन यूनियनें अपनी मांगों पर कायम रहीं। यूनियन नेताओं के मुताबिक, मुख्य श्रम आयुक्त के स्तर पर हुई सुलह प्रक्रिया से समाधान नहीं निकलने के बाद हड़ताल का फैसला लिया गया।
BRICS Summit के दौरान आंदोलन होने के कारण इस हड़ताल को लेकर चर्चा और भी बढ़ गई है। हालांकि, बैंक यूनियनों का मुख्य मुद्दा 5-दिन के कार्य सप्ताह और कर्मचारियों से जुड़ी अन्य मांगों को लागू कराना है।
लगातार छुट्टियों से ग्राहकों की बढ़ सकती है परेशानी
हड़ताल के साथ सप्ताहांत और त्योहार की छुट्टी जुड़ने से बैंकिंग सेवाओं पर लगातार कई दिनों तक असर पड़ सकता है। ऐसे में जिन ग्राहकों के काम शाखा जाकर ही पूरे होने हैं, उन्हें अगले कार्यदिवस तक इंतजार करना पड़ सकता है।
वहीं डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल से रोजमर्रा के ऑनलाइन भुगतान और पैसे ट्रांसफर करने वाले ग्राहकों को अपेक्षाकृत कम परेशानी होगी। अब नजर इस बात पर है कि 5-दिन के कार्य सप्ताह की मांग पर सरकार और बैंक यूनियनों के बीच आगे कोई सहमति बनती है या नहीं।
 

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