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Baby Food Rules: महाराष्ट्र में फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड पर सख्ती, विज्ञापन से लेकर पैकेजिंग तक नए नियम
 

Baby Food Rules: महाराष्ट्र में फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड पर सख्ती, विज्ञापन से लेकर पैकेजिंग तक नए नियम

महाराष्ट्र में शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की ओर से सख्त नियमों पर जोर दिया गया है। राज्य के FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा और शिशु पोषण से जुड़े नियमों के पालन पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। महाराष्ट्र FDA के अधिकार क्षेत्र में Foods for Infant Nutrition Regulations, 2020 समेत कई खाद्य सुरक्षा नियम लागू हैं।
पैकेट पर स्तनपान से जुड़ी चेतावनी जरूरी
नए प्रावधानों के तहत फॉर्मूला मिल्क और शिशु आहार की पैकेजिंग पर मां के दूध के महत्व से जुड़ी जानकारी प्रमुखता से देने की व्यवस्था है। साथ ही उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में ऐसे दावों से बचना होगा, जिससे फॉर्मूला मिल्क को मां के दूध के बराबर या बेहतर विकल्प के तौर पर पेश किया जाए।
विज्ञापन और प्रमोशन पर सख्ती
फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड के प्रचार-प्रसार को लेकर भी नियम सख्त हैं। विज्ञापन, मुफ्त सैंपल, गिफ्ट, कूपन और अन्य प्रमोशनल गतिविधियों पर प्रतिबंध से जुड़े प्रावधान लागू हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर प्रचार को लेकर भी कंपनियों को संबंधित नियमों का पालन करना होगा।


पैकेट पर बच्चे या मां की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं
शिशु आहार की पैकेजिंग को लेकर भी विशेष नियम हैं। पैकेट पर बच्चे या मां की तस्वीर के इस्तेमाल पर रोक का उद्देश्य उत्पाद को आकर्षक बनाकर उसके प्रचार को बढ़ावा देने से रोकना है। निर्माताओं और ब्रांड मालिकों को लेबलिंग से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।
प्रिजर्वेटिव और अतिरिक्त फ्लेवर पर नजर
बेबी फूड में इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव, रंग और फ्लेवरिंग पदार्थों को लेकर भी सख्त मानक हैं। अतिरिक्त सुक्रोज के इस्तेमाल पर भी निर्धारित सीमा और जरूरत से जुड़े नियम लागू होते हैं। कंपनियां लेबल पर ऐसे भ्रामक दावे नहीं कर सकतीं, जिनसे उपभोक्ता को उत्पाद में चीनी की मात्रा को लेकर गलत जानकारी मिले।
गंभीर साइड इफेक्ट की रिपोर्टिंग जरूरी
फॉर्मूला मिल्क इस्तेमाल करने वाले बच्चों में किसी संदिग्ध प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी मिलने पर अस्पतालों और बाल रोग विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। निर्माताओं को गंभीर प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग और शिकायतों की निगरानी के लिए व्यवस्था बनाए रखनी होगी।
इसके अलावा निर्माताओं, आयातकों और ब्रांड मालिकों के लिए बैच की ट्रेसबिलिटी, शिकायतों का रिकॉर्ड और जरूरत पड़ने पर उत्पाद को बाजार से वापस लेने की व्यवस्था रखना जरूरी है।
फॉर्मूला मिल्क क्या होता है?
फॉर्मूला मिल्क शिशुओं के लिए तैयार किया गया दूध का विकल्प है। आमतौर पर यह पाउडर के रूप में मिलता है, जिसे निर्धारित मात्रा में पानी के साथ मिलाकर दिया जाता है। इसमें बच्चे की पोषण जरूरतों के अनुसार प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज जैसे पोषक तत्व शामिल किए जाते हैं।
क्या हर बच्चे के लिए फॉर्मूला मिल्क जरूरी है?
स्वस्थ शिशुओं के लिए WHO पहले छह महीने तक केवल स्तनपान की सलाह देता है। छह महीने के बाद उपयुक्त पूरक आहार शुरू करते हुए स्तनपान जारी रखने की सिफारिश की जाती है।
हालांकि, कुछ परिस्थितियों में स्तनपान संभव नहीं होने या चिकित्सकीय कारणों से डॉक्टर फॉर्मूला फीड की सलाह दे सकते हैं। ऐसे मामलों में बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी जिम्मेदारी
शिशु आहार से जुड़े नियम केवल मैन्युफैक्चरर तक सीमित नहीं हैं। सप्लाई चेन, आयात, ब्रांडिंग और बिक्री से जुड़े कारोबारों को भी लागू खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग नियमों का पालन करना होता है। महाराष्ट्र FDA फिलहाल खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को मजबूत कर रहा है।
 

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