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Air Travel: 2027 से हवाई जहाज के ईंधन में मिलाना होगा SAF, 2040 तक 20% करने का प्रस्ताव; क्या महंगे होंगे फ्लाइट टिकट?

Air Travel: 2027 से हवाई जहाज के ईंधन में मिलाना होगा SAF, 2040 तक 20% करने का प्रस्ताव; क्या महंगे होंगे फ्लाइट टिकट?

हवाई यात्रा को पर्यावरण के लिए कम नुकसानदायक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने एयरलाइंस के लिए विमानों के ईंधन में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) मिलाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत जनवरी 2027 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के ईंधन में 1% SAF मिलाने की योजना है। इस हिस्सेदारी को धीरे-धीरे बढ़ाकर 2040 तक 20% करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस संबंध में ड्राफ्ट SAF पॉलिसी 2026 जारी की है। फिलहाल यह प्रस्ताव है और इसे अंतिम नियमों का रूप दिया जाना बाकी है।

क्या होता है SAF फ्यूल?

SAF यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल एक वैकल्पिक विमान ईंधन है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ मिलाकर किया जा सकता है। इसे फसलों, जैविक कचरे और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से तैयार किया जाता है।

इस ईंधन को भी विमान के इंजन में इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है। SAF का मुख्य उद्देश्य हवाई यात्रा के दौरान होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है। सरकार इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देकर विमानन क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की कोशिश कर रही है।

किस साल कितना SAF मिलाने का है प्रस्ताव?

सरकार की ड्राफ्ट नीति में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए SAF की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया गया है।

समय

SAF मिलाने का प्रस्ताव

जनवरी 2027

1%

2030

5%

2040

20%

इस योजना के तहत शुरुआत में कम मात्रा में SAF का इस्तेमाल होगा। इसके बाद उत्पादन और उपलब्धता बढ़ने के साथ इसकी हिस्सेदारी में भी इजाफा किया जाएगा।

नियमों का पालन नहीं करने पर लगेगा जुर्माना

ड्राफ्ट नीति में SAF ब्लेंडिंग के लक्ष्य के साथ नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई का भी प्रस्ताव है। इसके मुताबिक, निर्धारित मात्रा में SAF नहीं मिलाने पर एयरलाइंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका मकसद कंपनियों को तय लक्ष्यों के प्रति जवाबदेह बनाना है।

भारत से ही खरीदना होगा ज्यादातर विमान ईंधन

ड्राफ्ट नीति में ईंधन की खरीद को लेकर भी अहम प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को अपनी सालाना ATF जरूरत का कम से कम 90% हिस्सा भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से पूरा करना होगा।

इस नियम का उद्देश्य 'इकोनॉमिक टैंकरिंग' को रोकना है। इसके अलावा एयरपोर्ट्स को SAF के भंडारण, रखरखाव और वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी देने का भी प्रस्ताव है। इसके लिए उन्हें तेल कंपनियों के साथ मिलकर काम करना होगा।

क्या महंगे हो जाएंगे हवाई टिकट?

SAF नीति लागू होने का असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ सकता है। दरअसल, अगर SAF की कीमत पारंपरिक ATF से ज्यादा रहती है तो विमान कंपनियों का ईंधन खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में भविष्य में इसका असर हवाई टिकटों की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है।

हालांकि, फिलहाल टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई फैसला नहीं हुआ है। यह प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट स्तर पर है। अंतिम नीति और SAF की वास्तविक लागत सामने आने के बाद ही यात्रियों पर इसके संभावित असर का अंदाजा लगाया जा सकेगा।

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