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8th Pay Commission: रिटायरमेंट के बाद कितनी मिलेगी पेंशन? OPS-NPS की बहस के बीच बढ़ी कर्मचारियों की चिंता
 

8th Pay Commission: रिटायरमेंट के बाद कितनी मिलेगी पेंशन? OPS-NPS की बहस के बीच बढ़ी कर्मचारियों की चिंता

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आयोग के गठन के बाद कर्मचारी संगठनों और दूसरे पक्षों के साथ अलग-अलग शहरों में बैठकें की जा रही हैं। इन बैठकों में वेतन, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों के साथ पेंशन से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।
खास तौर पर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आय को लेकर कर्मचारी संगठनों की चिंताएं सामने आई हैं। कई संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को बहाल करने की मांग रखी है, जबकि NPS और Unified Pension Scheme (UPS) के तहत मिलने वाली पेंशन व्यवस्था में बदलाव की मांग भी की जा रही है।
8वें वेतन आयोग को मिला है 18 महीने का समय
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसका प्रमुख काम केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े वेतन, पेंशन, भत्तों तथा दूसरी सेवा शर्तों में संभावित बदलावों को लेकर विभिन्न पक्षों के सुझावों पर विचार करना है।


इन शहरों में हुईं बैठकें
आयोग की ओर से अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ बैठकें की जा रही हैं। सितंबर में पुडुचेरी में 9 सितंबर को बैठक हुई, जबकि चंडीगढ़ में 16, 17 और 18 सितंबर को चर्चा हुई।
इसके बाद अक्टूबर में बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित है। इन बैठकों के दौरान कर्मचारी संगठन अपनी मांगों और सुझावों को आयोग के सामने रख रहे हैं।
OPS और NPS को लेकर क्या है विवाद?
8वें वेतन आयोग के सामने सबसे अहम मुद्दों में से एक पेंशन व्यवस्था भी है। खासकर 2004 के बाद नियुक्त केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS और NPS को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है।
कई कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग को दिए ज्ञापनों में कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। इन संगठनों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित और पर्याप्त आय की सुरक्षा उनके लिए महत्वपूर्ण है।


OPS बहाली की मांग क्यों उठ रही है?
Survey of India के Ministerial Staff Association (MSA) ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग रखी है। संगठन ने अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन देने की भी मांग की है।
वहीं Federation of National Postal Organisations (FNPO) ने NPS और UPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को Defined-Benefit Pension व्यवस्था में वापस लाने की मांग की है।
इन संगठनों का तर्क है कि निश्चित पेंशन व्यवस्था में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आय को लेकर कर्मचारियों को ज्यादा स्पष्टता मिल सकती है।
पेंशन बढ़ाने की भी मांग
Railway Senior Citizens Welfare Society ने गारंटीड न्यूनतम पेंशन और रिटायरमेंट के बाद बेहतर वित्तीय सुरक्षा की मांग उठाई है।
इसके अलावा Bharat Pensioners’ Samaj (BPS) ने न्यूनतम पेंशन को ₹45,000 करने की मांग रखी है। संगठन ने अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत के बराबर पेंशन और अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर फैमिली पेंशन की मांग भी की है।


सिर्फ पेंशन ही नहीं, फिटमेंट फैक्टर पर भी नजर
8वें वेतन आयोग के सामने पेंशन के अलावा फिटमेंट फैक्टर और वेतन संशोधन जैसे मुद्दे भी रखे जा रहे हैं। कर्मचारी संगठन न्यूनतम वेतन, भत्तों और पेंशन में सुधार समेत कई मांगें आयोग के सामने पेश कर रहे हैं।
हालांकि, आयोग के सामने रखी गई मांगें अपने आप में अंतिम फैसला नहीं हैं। इन सुझावों पर विचार के बाद आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को देगा।
कब आ सकती है आयोग की रिपोर्ट?
आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसकी अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 के आसपास आने की संभावना बताई जा रही है।
इसके बाद केंद्र सरकार आयोग की सिफारिशों पर विचार करेगी और यह तय करेगी कि कर्मचारियों के वेतन और पेंशन व्यवस्था में किस तरह के बदलाव किए जाएं।
इसलिए फिलहाल OPS, NPS या UPS को लेकर अंतिम बदलाव मानना जल्दबाजी होगी। 8वें वेतन आयोग की सिफारिश और उसके बाद सरकार के फैसले से ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों की भविष्य की पेंशन व्यवस्था की तस्वीर स्पष्ट होगी।
 

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