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8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की बड़ी मांग! 3% की जगह 5-7% सालाना इंक्रीमेंट मिला तो बदल जाएगी सैलरी की तस्वीर
 

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की बड़ी मांग! 3% की जगह 5-7% सालाना इंक्रीमेंट मिला तो बदल जाएगी सैलरी की तस्वीर


नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा करने के साथ कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगी यूनियनों से भी सुझाव ले रहा है। अब कर्मचारियों की मांग सिर्फ बेहतर फिटमेंट फैक्टर तक सीमित नहीं है। यूनियनों ने सालाना वेतन वृद्धि की मौजूदा 3% दर को बढ़ाकर 5% से 7% करने की मांग भी उठाई है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारियों के लिए ज्यादा फायदा किसमें होगा—शुरुआत में बड़ा फिटमेंट फैक्टर मिलने में या हर साल ज्यादा इंक्रीमेंट मिलने में?

फिटमेंट फैक्टर से तुरंत बढ़ेगी बेसिक सैलरी

नया वेतन आयोग लागू होने पर फिटमेंट फैक्टर के जरिए मौजूदा बेसिक पे को एक नए स्तर पर तय किया जा सकता है। इसका सीधा असर कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी पर पड़ेगा।

यानी अगर फिटमेंट फैक्टर ज्यादा रहता है तो वेतन संशोधन के समय ही कर्मचारी को बड़ा फायदा मिल सकता है। इसके साथ ही बेसिक पे से जुड़े दूसरे लाभों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि, केवल शुरुआती बढ़ोतरी को देखकर पूरे करियर का फायदा तय करना सही नहीं होगा।

लंबे समय में सालाना इंक्रीमेंट का बड़ा असर

सालाना इंक्रीमेंट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हर साल बढ़ने वाली बेसिक सैलरी पर आगे की वेतन वृद्धि लागू होती है। यही वजह है कि लंबे समय में ज्यादा इंक्रीमेंट दर का असर काफी बड़ा हो सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹56,100 है और सालाना वृद्धि 3% के बजाय 5% या 7% हो जाती है, तो कई वर्षों में दोनों स्थितियों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है।

यानी फिटमेंट फैक्टर शुरुआत में तेज छलांग देता है, जबकि ज्यादा इंक्रीमेंट समय के साथ वेतन को लगातार ऊपर ले जाने का काम करता है।

7% इंक्रीमेंट का 30 साल में कितना असर?

मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹56,100 है और केवल उदाहरण के तौर पर 7% वार्षिक वृद्धि लगातार लागू होती है। चक्रवृद्धि गणना के आधार पर लंबे समय में बेसिक पे में काफी बड़ा अंतर दिखाई दे सकता है।

इसी वजह से कर्मचारी संगठन 5% से 7% की वार्षिक वेतन वृद्धि की मांग को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। हालांकि वास्तविक सैलरी का आंकड़ा भविष्य के वेतन आयोग की सिफारिशों, सरकार के फैसले, पे मैट्रिक्स और लागू होने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।

कर्मचारियों के लिए सबसे बेहतर क्या होगा?

अगर कर्मचारियों के नजरिए से देखा जाए तो सबसे फायदेमंद स्थिति बड़ा फिटमेंट फैक्टर और ज्यादा सालाना इंक्रीमेंट, दोनों का संयोजन हो सकता है।

बड़ा फिटमेंट फैक्टर: वेतन संशोधन के समय बेसिक पे में तत्काल बढ़ोतरी।
5-7% सालाना इंक्रीमेंट: लंबे समय में बेसिक पे की वृद्धि की रफ्तार तेज।
दोनों का फायदा: शुरुआती बढ़ोतरी के साथ भविष्य में कंपाउंडिंग का लाभ।

इसलिए केवल फिटमेंट फैक्टर और केवल इंक्रीमेंट में से किसी एक को बेहतर बताना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

कब तक आ सकती है 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

8वां केंद्रीय वेतन आयोग फिलहाल विभिन्न हितधारकों से सुझाव और मांगें जुटाने की प्रक्रिया में है। आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, इंक्रीमेंट की दर में कोई बदलाव होगा या नहीं और नई वेतन संरचना किस तरह लागू की जाएगी।

फिलहाल 5% से 7% इंक्रीमेंट की मांग कर्मचारी संगठनों की मांग है, कोई तय सरकारी फैसला नहीं। इसलिए कर्मचारियों को अंतिम घोषणा के लिए आयोग की सिफारिश और केंद्र सरकार के निर्णय का इंतजार करना होगा।
 

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