देश में फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों की लॉन्चिंग अटकी कंपनियों और तेल कंपनियों में फ्यूल की कमी को लेकर छिडी बहस
देश में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों की लॉन्चिंग फिलहाल अटक गई है। ऑटोमोबाइल कंपनियों और तेल कंपनियों के बीच तैयारियों और जिम्मेदारी को लेकर तालमेल न बनने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
ऑटो कंपनियों का कहना है कि फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों को बाजार में लाने के लिए पहले उपयुक्त फ्यूल उपलब्ध होना जरूरी है। उनका तर्क है कि जब तक पूरे देश में पर्याप्त और मानकीकृत फ्लेक्स फ्यूल की सप्लाई नहीं होगी, तब तक इन वाहनों को बड़े स्तर पर लॉन्च करना व्यावहारिक नहीं है।
वहीं दूसरी ओर तेल कंपनियों का कहना है कि पहले ऑटो कंपनियों को फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों का उत्पादन और लॉन्च शुरू करना चाहिए ताकि मांग स्पष्ट हो सके। उनका मानना है कि जब बाजार में वाहन उपलब्ध होंगे तभी फ्यूल सप्लाई नेटवर्क को तेजी से विकसित किया जा सकेगा।
क्या है फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी
फ्लेक्स फ्यूल वाहन ऐसे होते हैं जो पेट्रोल के साथ साथ इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन पर भी चल सकते हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण प्रदूषण को घटाना है। सरकार भी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
अड़चन कहां आ रही है
विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चुनौती सप्लाई चेन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की है। एक तरफ वाहन निर्माता कंपनियां तैयार हैं, लेकिन फ्यूल उपलब्धता सीमित है। दूसरी तरफ तेल कंपनियां मांग के बिना बड़े निवेश से बच रही हैं।

