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न ट्यूब, न हवा… फिर भी चलेगी कार! कंपनी ने पेश किया भविष्य का ‘एयर फ्री’ टायर, जाने इसकी खासियत 

न ट्यूब, न हवा… फिर भी चलेगी कार! कंपनी ने पेश किया भविष्य का ‘एयर फ्री’ टायर, जाने इसकी खासियत 

अगर गाड़ी चलाते समय टायर पंक्चर हो जाए, तो सबसे पहले मन में यही आता है, "आज का दिन खराब है।" हवा निकल जाती है, कार रुक जाती है, और सफर रुक जाता है। लेकिन अब, टायर की दुनिया में एक ऐसी टेक्नोलॉजी आ रही है जो इस परेशानी को पुरानी बात बना सकती है। जापान की मशहूर टायर कंपनी ब्रिजस्टोन ने एक ऐसा टायर पेश किया है जिसमें हवा की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है। इसका मतलब है कि अब हवा भरने की चिंता नहीं, पंक्चर होने का डर नहीं, और बीच सड़क पर रुकने की भी ज़रूरत नहीं।

ब्रिजस्टोन ने अपने एयरलेस टायर का थर्ड-जेनरेशन मॉडल पेश किया है। इस नए एयरलेस टायर में पिछले टायर के मुकाबले कई बड़े सुधार हैं, जो इसे और भी बेहतर बनाते हैं। कंपनी इसे कॉन्सेप्ट स्टेज से असल दुनिया, प्रोडक्शन-रेडी लेवल पर ले गई है। कंपनी धीरे-धीरे इस एयरलेस टायर को सोशल लेवल पर लागू करने की ओर बढ़ रही है। अब तक भविष्य का टायर कहे जाने वाले एयरलेस टायर जल्द ही सड़क पर चलने वाली गाड़ियों में दिखेंगे।

एयरफ्री टायर टेक्नोलॉजी
ब्रिजस्टोन का यह थर्ड-जेनरेशन एयरफ्री टायर एडवांस्ड सिमुलेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है और इसमें मजबूत और लचीले मटीरियल से बना स्ट्रक्चर है। कंपनी का कहना है कि इससे टायर अलग-अलग मौसम और सड़क की कंडीशन में सबसे अच्छा परफॉर्म कर पाता है। इसका मकसद टायर को ज़्यादा भरोसेमंद और लंबे समय तक चलने वाला बनाना है।

AI-बेस्ड डायनामिक स्ट्रक्चर
इस टायर की एक खास बात इसका डायनामिक स्ट्रक्चरल डिज़ाइन है। यह सेकंड-जेनरेशन के राइड कम्फर्ट पर फोकस से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-बेस्ड ऑटोमेटेड लर्निंग सिस्टम का इस्तेमाल करता है। यह सिस्टम अलग-अलग कंडीशन के हिसाब से टायर के शेप और प्रेशर को ऑटोमैटिकली एडजस्ट करता है। इससे टायर को अलग-अलग तरह की गाड़ियों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

ब्लू स्पोक्स सेफ्टी बढ़ाते हैं
कंपनी ने इन टायरों को बनाने में ब्लू स्पोक्स (ब्लू स्पोक व्हील) जैसा स्ट्रक्चर इस्तेमाल किया है। सीधे शब्दों में कहें तो, टायरों में ब्लू स्पोक्स हैं जो कम रोशनी और शाम के समय साफ दिखाई देते हैं। इसका मकसद लोकल कम्युनिटी मोबिलिटी में सेफ्टी को बेहतर बनाना है। हवा के बजाय, ये स्पोक्स रीसायकल किए गए थर्मोप्लास्टिक रेज़िन से बने हैं, जो गाड़ी का पूरा वज़न आसानी से उठा सकते हैं। ब्रिजस्टोन का यह भी दावा है कि ये स्पोक रोड शॉक को भी कम करते हैं।

इन टायरों की डेमो टेस्टिंग मार्च 2024 में जापान के टोक्यो के कोडाइरा शहर में शुरू हुई थी और अभी भी चल रही है। यह टेस्टिंग ग्रीन स्लो मोबिलिटी सॉल्यूशन के तौर पर उनकी उपयोगिता का मूल्यांकन करने के लिए की गई थी। हालांकि, आम पैसेंजर कार यूज़र्स को थोड़ा और इंतज़ार करना पड़ सकता है। अभी, ब्रिजस्टोन इन एयर-फ्री टायरों की टेस्टिंग कमर्शियल ट्रकों और अल्ट्रा-कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर कर रहा है। कंपनी का मानना ​​है कि प्रोफेशनल फ्लीट गाड़ियों को ज़्यादा मेंटेनेंस की ज़रूरत होती है, इसलिए यह टेक्नोलॉजी वहां ज़्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।

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