2031 तक भारत में कारों की बिक्री का नया रिकॉर्ड! मारुति सुजुकी ने बताया ऑटो मार्केट का बड़ा प्लान
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार आने वाले वर्षों में एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी का अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल मार्केट में तेज विस्तार देखने को मिलेगा और वित्त वर्ष 2030-31 तक कारों की कुल बिक्री 6 मिलियन से ऊपर पहुंच सकती है।
कंपनी का मानना है कि बढ़ती आय, नए ग्राहकों की एंट्री, बदलती जरूरतों और वाहन बाजार के विस्तार से भारत दुनिया के प्रमुख ऑटोमोबाइल बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। इस बढ़ती मांग को देखते हुए मारुति सुजुकी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने से लेकर नई एसयूवी और वैकल्पिक ईंधन तकनीक पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
छोटी कारों की फिर बढ़ सकती है डिमांड
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में एसयूवी का दबदबा तेजी से बढ़ा है। इसके बावजूद मारुति सुजुकी को उम्मीद है कि आने वाले समय में एंट्री-लेवल और छोटी कारों की मांग में फिर से तेजी आ सकती है।
कंपनी के अनुसार, पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ने और मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से स्मॉल कार सेगमेंट को नई रफ्तार मिल सकती है। आने वाले वर्षों में इस सेगमेंट की ग्रोथ पिछले कुछ सालों की तुलना में बेहतर रहने का अनुमान है।
प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने पर बड़ा फोकस
बढ़ती संभावित मांग को देखते हुए कंपनी ने अपने मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क को विस्तार देने की योजना बनाई है। मारुति सुजुकी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता को करीब 2.9 मिलियन यूनिट तक पहुंचाने का है।
वहीं, वित्त वर्ष 2030-31 तक कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाकर लगभग 3.65 मिलियन यूनिट सालाना करने की दिशा में काम कर रही है।
इसके लिए कंपनी हरियाणा के खरखौदा और गुजरात के हंसलपुर स्थित प्लांट्स में नई उत्पादन सुविधाओं और लाइनों को जोड़ने पर फोकस कर रही है।
नई एसयूवी से बाजार में बढ़ाएगी पकड़
मारुति सुजुकी सिर्फ छोटी कारों के बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी तेजी से बढ़ते एसयूवी सेगमेंट में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
अगले पांच से छह वर्षों के दौरान कंपनी कई नई एसयूवी बाजार में उतारने की योजना पर काम कर रही है। बताया जा रहा है कि इस अवधि में करीब सात नए एसयूवी मॉडल लॉन्च किए जा सकते हैं।
एसयूवी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह रणनीति कंपनी को भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने में मदद कर सकती है।
बायोगैस और फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी पर भी नजर
भविष्य की ऑटोमोबाइल रणनीति में सिर्फ पेट्रोल और डीजल वाहनों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कंपनी स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन विकल्पों पर भी तेजी से काम कर रही है।
नेट-जीरो लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए बायोगैस और फ्लेक्स-फ्यूल जैसी तकनीकों को लेकर संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। ऐसे विकल्प भविष्य में आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मददगार हो सकते हैं।
ऑटो सेक्टर की ग्रोथ से बढ़ेंगे रोजगार
कार बाजार का विस्तार केवल वाहन कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े हजारों छोटे-बड़े सप्लायर, पार्ट्स निर्माता, डीलर और सर्विस सेक्टर भी इससे सीधे प्रभावित होते हैं।
अगर भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट आने वाले वर्षों में अनुमान के अनुसार तेजी से बढ़ता है, तो इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिल सकती है। साथ ही नए रोजगार के अवसर पैदा होने, वेंडर नेटवर्क के विस्तार और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
भारतीय ऑटो बाजार के लिए बड़ा बदलाव
मारुति सुजुकी का भविष्य को लेकर सकारात्मक अनुमान संकेत देता है कि अगले पांच से छह साल भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए बेहद अहम हो सकते हैं।
एक तरफ छोटी कारों की मांग में संभावित वापसी, दूसरी ओर एसयूवी की बढ़ती लोकप्रियता और साथ ही वैकल्पिक ईंधन तकनीक पर जोर—ये सभी बदलाव भारतीय वाहन बाजार को नई दिशा दे सकते हैं।
यदि बाजार अनुमान के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो 2030-31 तक भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर बिक्री, उत्पादन और रोजगार के लिहाज से एक नए स्तर पर पहुंच सकता है।

