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EV Battery Tips: गर्मी में क्यों घट जाती है इलेक्ट्रिक वाहन की रेंज? जानिए बैटरी पर तापमान का असर

EV Battery Tips: गर्मी में क्यों घट जाती है इलेक्ट्रिक वाहन की रेंज? जानिए बैटरी पर तापमान का असर

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच बैटरी की परफॉर्मेंस को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। कई EV मालिकों की शिकायत होती है कि भीषण गर्मी के दिनों में उनकी गाड़ी की रेंज कम हो जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह बैटरी पर पड़ने वाला तापमान का प्रभाव है।

एक तय तापमान पर सबसे बेहतर काम करती हैं बैटरियां

इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियां एक निश्चित तापमान सीमा में सबसे अच्छा प्रदर्शन करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर 15 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बैटरी की कार्यक्षमता और क्षमता सबसे बेहतर रहती है।

जब तापमान इस सीमा से अधिक या कम हो जाता है, तो बैटरी की दक्षता प्रभावित होने लगती है, जिसका असर सीधे वाहन की रेंज और परफॉर्मेंस पर पड़ता है।

ज्यादा गर्मी में क्यों घटती है रेंज?

गर्मी बढ़ने पर बैटरी के अंदर रासायनिक प्रक्रियाएं तेज हो जाती हैं। अत्यधिक तापमान बैटरी सेल्स पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) बैटरी को सुरक्षित रखने के लिए उसकी क्षमता और पावर आउटपुट को नियंत्रित करने लगता है।

इसके अलावा, बैटरी को ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम भी अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग करता है, जिससे वाहन की कुल रेंज में कमी आ सकती है।

बैटरी की लाइफ पर भी पड़ सकता है असर

लगातार अत्यधिक गर्म वातावरण में वाहन खड़ा रखने या चलाने से बैटरी की दीर्घकालिक सेहत प्रभावित हो सकती है। हालांकि आधुनिक EV में एडवांस थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम दिए जाते हैं, फिर भी अत्यधिक तापमान बैटरी की उम्र को प्रभावित कर सकता है।

गर्मी में EV मालिक क्या करें?

  • वाहन को जहां तक संभव हो छायादार स्थान पर पार्क करें।
  • चार्जिंग के दौरान अत्यधिक धूप से बचें।
  • बैटरी को बार-बार 100% तक चार्ज करने से बचें, यदि इसकी आवश्यकता न हो।
  • निर्माता द्वारा दिए गए बैटरी देखभाल निर्देशों का पालन करें।
  • लंबी यात्रा से पहले बैटरी और वाहन की स्थिति की जांच करें।

क्या सर्दियों में भी पड़ता है असर?

सिर्फ गर्मी ही नहीं, अत्यधिक ठंड भी बैटरी की क्षमता को प्रभावित करती है। कम तापमान में बैटरी के भीतर रासायनिक प्रतिक्रियाएं धीमी हो जाती हैं, जिससे चार्जिंग और डिस्चार्जिंग की गति कम हो सकती है।

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