Electric Vehicle Race: दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां किस देश में? जानिए भारत की रैंक और UP का हाल
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और बढ़ते प्रदूषण के बीच दुनिया तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ रही है। कार से लेकर स्कूटर और थ्री-व्हीलर तक, EV अब कई देशों में रोजमर्रा के ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बन चुके हैं। सरकारें भी ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर दे रही हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन आखिर किस देश में हैं और इस दौड़ में भारत कहां खड़ा है?
चीन ने बनाई EV बाजार में सबसे बड़ी बढ़त
इलेक्ट्रिक वाहनों के वैश्विक बाजार में चीन सबसे आगे है। चीन में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार काफी तेजी से हुआ है और देश दुनिया के सबसे बड़े EV बाजार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में बिकने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में चीन की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी तक बताई जाती है। चीन की सड़कों पर करोड़ों इलेक्ट्रिक वाहन मौजूद हैं।
चीन की कंपनियों ने सिर्फ घरेलू बाजार में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है। BYD जैसी कंपनियां वैश्विक EV बाजार में बड़ी कंपनियों को कड़ी चुनौती दे रही हैं।
अमेरिका और यूरोप भी दौड़ में आगे
चीन के बाद अमेरिका इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े बाजारों में शामिल है। इसके अलावा यूरोप के कई देशों में भी EV को तेजी से अपनाया जा रहा है।
खास तौर पर नॉर्वे इलेक्ट्रिक कारों को अपनाने के मामले में दुनिया के सबसे चर्चित देशों में है। वहां नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लंबे समय से काफी ऊंची रही है।
यूरोपीय देशों में टैक्स इंसेंटिव, चार्जिंग नेटवर्क और पर्यावरण से जुड़ी नीतियों ने EV की बिक्री को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
भारत अभी कारों की ग्लोबल EV रेस में पीछे
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री लगातार बढ़ रही है, लेकिन कुल वैश्विक EV कार बाजार में देश की हिस्सेदारी अभी चीन, अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों की तुलना में काफी कम है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, कारों के वैश्विक इलेक्ट्रिक बाजार में भारत 11वें स्थान पर है। हालांकि तस्वीर सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं है।
भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। कम चलने की लागत और शहरों में बढ़ती मांग के कारण इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-रिक्शा जैसे वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
2030 तक EV को लेकर भारत का बड़ा लक्ष्य
भारत ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां और योजनाएं लागू की हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को काफी बढ़ाना है।
इसी दिशा में PM E-DRIVE जैसी योजनाओं के जरिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उससे जुड़े इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश बना देश का बड़ा EV हब
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार की बात करें तो उत्तर प्रदेश प्रमुख राज्यों में शामिल है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 4 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं और कुल रजिस्ट्रेशन के मामले में यूपी देश में आगे है।
उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी EV बाजार तेजी से बढ़ा है। इन राज्यों में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी मांग ने इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार को गति दी है।
आने वाले वर्षों में बढ़ सकती है EV की रफ्तार
भारत के सामने अभी चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी की कीमत, वाहन की शुरुआती लागत और लंबी दूरी की यात्रा जैसे कई सवाल हैं। इसके बावजूद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के बढ़ते इस्तेमाल से साफ है कि देश में EV का बाजार तेजी से आकार ले रहा है।
दुनिया में फिलहाल चीन इलेक्ट्रिक वाहनों की दौड़ में सबसे आगे है, जबकि भारत तेजी से बढ़ते बाजारों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्ती बैटरी तकनीक के विस्तार के साथ भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

