Car Knowledge: पेट्रोल और डीजल इंजन में क्या है अंतर? जानें कैसे पैदा होती है ताकत और किसका माइलेज है बेहतर
नई कार खरीदते समय लोगों के सामने अक्सर पेट्रोल और डीजल इंजन का विकल्प होता है। कुछ लोग पेट्रोल कार की स्मूद ड्राइविंग पसंद करते हैं, तो कुछ बेहतर माइलेज और ज्यादा टॉर्क के लिए डीजल कार चुनते हैं। दोनों इंजन का काम गाड़ी को ताकत देना है, लेकिन इनके काम करने का तरीका अलग होता है। यही अंतर इनकी पावर, माइलेज, आवाज और ड्राइविंग अनुभव को प्रभावित करता है।
पेट्रोल इंजन कैसे करता है काम?
पेट्रोल इंजन को स्पार्क इग्निशन इंजन कहा जाता है। इसमें हवा और पेट्रोल को सिलेंडर में भेजकर पिस्टन की मदद से दबाया जाता है। इसके बाद स्पार्क प्लग चिंगारी पैदा करता है, जिससे हवा और पेट्रोल का मिश्रण जलने लगता है। इससे बनने वाला दबाव पिस्टन को नीचे धकेलता है। पिस्टन की यह गति क्रैंकशाफ्ट के जरिए घूमने वाली ताकत में बदल जाती है और ट्रांसमिशन सिस्टम इसे पहियों तक पहुंचाता है।
पेट्रोल इंजन आमतौर पर ज्यादा RPM पर बेहतर पावर देते हैं। इसलिए इनकी ड्राइविंग तेज एक्सीलरेशन और स्मूद परफॉर्मेंस के लिए पसंद की जाती है।
डीजल इंजन में कैसे पैदा होती है ताकत?
डीजल इंजन को कंप्रेशन इग्निशन इंजन कहा जाता है। इसमें सबसे पहले सिलेंडर में केवल हवा भरी जाती है। पिस्टन इस हवा को बहुत ज्यादा दबाता है, जिससे उसका तापमान बढ़ जाता है। इसके बाद फ्यूल इंजेक्टर गर्म हवा में डीजल का छिड़काव करता है। गर्म हवा के संपर्क में आते ही डीजल जलने लगता है और पैदा हुआ दबाव पिस्टन को नीचे धकेलता है।
यही वजह है कि सामान्य डीजल इंजन में पेट्रोल इंजन की तरह स्पार्क प्लग की जरूरत नहीं होती।
डीजल इंजन में ज्यादा टॉर्क क्यों मिलता है?
डीजल इंजन की प्रमुख खासियत कम RPM पर ज्यादा टॉर्क पैदा करना है। टॉर्क का मतलब इंजन की घुमाने वाली ताकत से है। इसी कारण डीजल कारें भारी सामान ले जाने, चढ़ाई चढ़ने और हाईवे पर लंबी दूरी तय करने के लिए उपयोगी मानी जाती हैं।
दूसरी ओर, पेट्रोल इंजन आमतौर पर ज्यादा RPM पर बेहतर पावर देते हैं। इसलिए तेज एक्सीलरेशन और स्पोर्टी ड्राइविंग पसंद करने वाले लोग पेट्रोल कारों को प्राथमिकता देते हैं।
किस इंजन का माइलेज बेहतर होता है?
सामान्य तौर पर डीजल कारें पेट्रोल कारों की तुलना में बेहतर माइलेज देती हैं। इसकी वजह डीजल इंजन का ज्यादा कंप्रेशन रेशियो और ईंधन की ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल है। डीजल में प्रति लीटर ऊर्जा की मात्रा भी पेट्रोल से अधिक होती है। हालांकि, वास्तविक माइलेज कार के मॉडल, इंजन, ड्राइविंग स्टाइल और सड़क की स्थिति पर निर्भर करता है।
आवाज और मेंटेनेंस में भी है अंतर
पेट्रोल इंजन आमतौर पर कम आवाज और वाइब्रेशन के साथ चलते हैं। वहीं डीजल इंजन में कंप्रेशन और फ्यूल इंजेक्शन की प्रक्रिया के कारण शोर और कंपन अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकते हैं।
मेंटेनेंस की बात करें तो डीजल इंजन में हाई-प्रेशर फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और कुछ मॉडलों में DPF जैसी तकनीक होती है। दूसरी तरफ पेट्रोल इंजन में स्पार्क प्लग और इग्निशन सिस्टम की नियमित जांच जरूरी होती है।
आपके लिए कौन-सी कार बेहतर?
अगर आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर में होती है और आप स्मूद व कम शोर वाली कार चाहते हैं, तो पेट्रोल इंजन अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, रोजाना लंबी दूरी तय करने, हाईवे पर ज्यादा चलने या बेहतर माइलेज को प्राथमिकता देने वालों के लिए डीजल कार उपयोगी हो सकती है। हालांकि, खरीदारी से पहले कार की कीमत, ईंधन खर्च, सर्विस लागत और अपनी जरूरतों की तुलना जरूर करें।

