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Car Buying Tips: कार खरीदें कैश या लोन पर? फैसला लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
 

Car Buying Tips: कार खरीदें कैश या लोन पर? फैसला लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

नई कार खरीदने से पहले सिर्फ कार की कीमत और मॉडल पर ध्यान देना काफी नहीं है। एक अहम सवाल यह भी होता है कि भुगतान पूरी तरह कैश से किया जाए या कार लोन लिया जाए। दोनों विकल्पों के अपने फायदे और नुकसान हैं। सही फैसला आपकी सेविंग्स, मौजूदा कर्ज, इमरजेंसी फंड और लोन की ब्याज दर जैसी चीजों पर निर्भर करता है।


कैश में कार खरीदने पर नहीं देना होगा ब्याज
अगर आपके पास कार खरीदने के बाद भी पर्याप्त रकम बची रहती है, तो कैश में भुगतान करने से लोन के ब्याज और EMI का बोझ नहीं रहता। हर महीने एक निश्चित रकम अलग रखने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
खासकर ऐसे लोगों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है, जिन पर पहले से कोई दूसरा लोन चल रहा है या आने वाले समय में बड़े खर्च होने वाले हैं।
हालांकि, केवल लोन से बचने के लिए अपनी लगभग पूरी सेविंग्स कार में लगा देना भी उचित नहीं माना जाता। कार खरीदने के बाद आपके पास पर्याप्त नकदी बचना जरूरी है।
इमरजेंसी फंड को रखें सुरक्षित
कार खरीदने के बाद अगर बैंक खाते में बहुत कम पैसा बचता है, तो अचानक आने वाला खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। मेडिकल जरूरत, नौकरी में बदलाव, परिवार से जुड़ा खर्च या कोई अन्य आपात स्थिति कभी भी सामने आ सकती है।
ऐसे में अगर पूरी रकम कैश में देने से आपका इमरजेंसी फंड प्रभावित हो रहा है, तो कार की कीमत का कुछ हिस्सा लोन के जरिए चुकाने पर विचार किया जा सकता है।
Car Loan लेने से बची रह सकती है सेविंग्स
लोन का एक बड़ा फायदा यह है कि आपको कार की पूरी कीमत एक साथ नहीं चुकानी पड़ती। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 12 लाख रुपये हैं और कार की कीमत 10 लाख रुपये है, तो पूरी रकम कैश में देने के बाद आपके पास 2 लाख रुपये बचेंगे।
वहीं, अगर आप डाउन पेमेंट के बाद कार की कीमत का कुछ हिस्सा लोन से चुकाते हैं, तो आपके पास ज्यादा नकदी उपलब्ध रह सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ बैंक खाते में पैसा रखने के लिए लोन लेना हमेशा बेहतर है।
Loan Interest और Investment Return की तुलना करें
लोन लेने से पहले उसकी ब्याज दर और आपके पैसे से मिलने वाले संभावित रिटर्न की तुलना करना जरूरी है। मान लीजिए कार लोन पर ब्याज दर 9% है, जबकि किसी निवेश से टैक्स, जोखिम और अन्य लागतों को ध्यान में रखने के बाद करीब 7% रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
ऐसे मामले में केवल निवेश बनाए रखने के लिए लोन लेना आर्थिक रूप से आकर्षक नहीं हो सकता, क्योंकि लोन का ब्याज एक निश्चित लागत है, जबकि निवेश का रिटर्न निश्चित नहीं होता।
फैसला आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर
कार खरीदने का फैसला केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कैश या लोन में से कौन सा विकल्प सामान्य तौर पर बेहतर है। अगर कैश भुगतान के बाद भी पर्याप्त इमरजेंसी फंड और दूसरी जरूरतों के लिए रकम बचती है, तो ब्याज से बचने का फायदा मिल सकता है।
दूसरी ओर, अगर पूरी रकम कैश में देने से आपकी सेविंग्स बहुत कम हो जाती हैं, तो आंशिक लोन लेने से नकदी का संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसलिए अंतिम निर्णय लेने से पहले डाउन पेमेंट, EMI, कुल ब्याज, इमरजेंसी फंड और निवेश के संभावित रिटर्न—इन सभी को एक साथ देखना जरूरी है।
 

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