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Yogini Ekadashi Katha: योगिनी एकादशी व्रत कथा, जिसे सुनने मात्र से मिलती है भगवान विष्णु की कृपा

Yogini Ekadashi Katha: योगिनी एकादशी व्रत कथा, जिसे सुनने मात्र से मिलती है भगवान विष्णु की कृपा

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने आने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इन्हीं में से एक है योगिनी एकादशी, जो आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से योगिनी एकादशी का व्रत करता है, उसे भगवान श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्गलोक में कुबेर नाम के एक राजा थे। वे भगवान शिव के परम भक्त थे और प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना किया करते थे। उनके राज्य में हेम नाम का एक माली रहता था, जिसका काम राजा के लिए प्रतिदिन पूजा के फूल लाना था।

हेम माली अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता था। एक दिन वह मानसरोवर से भगवान शिव की पूजा के लिए फूल लेने गया। लेकिन अपनी पत्नी के प्रेम और आकर्षण में वह इतना खो गया कि समय पर राजा कुबेर के लिए फूल लेकर नहीं पहुंचा।

राजा कुबेर ने जब पूजा का समय निकल जाने के बाद भी हेम माली को फूल लाते नहीं देखा तो उन्हें बहुत क्रोध आया। उन्होंने अपने सेवकों से हेम माली को बुलाने का आदेश दिया।

हेम माली के आने पर राजा ने उससे देरी का कारण पूछा। तब हेम माली ने अपनी गलती स्वीकार की। राजा कुबेर क्रोधित हो गए और उन्होंने हेम माली को श्राप दे दिया कि वह अपनी पत्नी से वियोग सहते हुए पृथ्वी पर जाकर कोढ़ी का जीवन व्यतीत करेगा।

श्राप के कारण हेम माली स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गया और उसे कई कष्टों का सामना करना पड़ा। वह जंगलों में भटकता रहा और दुखी जीवन बिताने लगा।

एक दिन घूमते-घूमते वह ऋषि मार्कंडेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने अपनी दिव्य दृष्टि से उसके दुख का कारण जान लिया। उन्होंने हेम माली को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

हेम माली ने श्रद्धापूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उसके सभी पाप नष्ट हो गए और वह अपने पुराने स्वरूप में वापस आ गया। इसके बाद वह फिर से स्वर्गलोक पहुंच गया और सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा।

योगिनी एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।

मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से योगिनी एकादशी का व्रत रखता है और भगवान विष्णु का स्मरण करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

योगिनी एकादशी पर करें भगवान विष्णु की पूजा

इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा करनी चाहिए। उन्हें पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी की कथा सुनने और व्रत करने से भगवान श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और भक्तों को जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद देते हैं।

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