नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की करें पूजा, वीडियो में देखें नौ दिनों का महत्व और पूजन के खास नियम
हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का विशेष अवसर माना जाता है। साल में प्रमुख रूप से दो बार चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि मनाई जाती है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान व्रत रखने, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और मां दुर्गा की व्रत कथा सुनने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आइए जानते हैं मां दुर्गा की पावन व्रत कथा, नवरात्रि व्रत का महत्व और पूजा करने की संपूर्ण विधि।
श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक राजा और उनकी प्रजा मां दुर्गा के परम भक्त थे। वे नियमित रूप से माता की पूजा करते और धर्म के मार्ग पर चलते थे। समय बीतने के साथ संसार में अधर्म और अत्याचार बढ़ने लगे। राक्षसों के आतंक से देवता भी परेशान हो गए। तब सभी देवताओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना की और संसार को संकट से मुक्त करने की प्रार्थना की।
देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने दिव्य स्वरूप धारण किया। उन्होंने महिषासुर नामक शक्तिशाली असुर से युद्ध किया। महिषासुर को अपनी शक्ति पर बहुत घमंड था और उसने देवताओं सहित तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंततः मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धर्म की स्थापना की और देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।
इसी कारण मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन देवी शक्ति की आराधना और दसवें दिन विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
मां दुर्गा की कृपा से दूर होते हैं कष्ट
एक अन्य प्रचलित नवरात्रि व्रत कथा के अनुसार, एक निर्धन ब्राह्मण मां दुर्गा का परम भक्त था। वह नियमित रूप से माता की पूजा करता और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उनकी सेवा करता था। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उसे आशीर्वाद दिया। माता की कृपा से उसके जीवन में सुख-शांति आई और परिवार की परेशानियां दूर होने लगीं।
इस कथा का संदेश है कि सच्ची श्रद्धा, संयम और अच्छे कर्मों के साथ की गई उपासना मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और सकारात्मकता प्रदान करती है।
धार्मिक मान्यता: नवरात्रि व्रत कथा के अलग-अलग क्षेत्रीय और पारिवारिक संस्करण प्रचलित हैं। पूजा के समय अपने परिवार की परंपरा के अनुसार प्रचलित कथा का पाठ भी किया जा सकता है।
नवरात्रि व्रत का महत्व
नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की शक्ति, साहस और करुणा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है। इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं, सात्विक भोजन करते हैं और नियमित रूप से पूजा-पाठ करते हैं।
नवरात्रि व्रत के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व इस प्रकार हैं:
- मां दुर्गा की आराधना: भक्त माता के नौ स्वरूपों की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
- मन की शुद्धि: उपवास, मंत्र जाप और ध्यान को आत्मसंयम तथा मानसिक एकाग्रता का माध्यम माना जाता है।
- सकारात्मकता का संदेश: मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- पारिवारिक सुख-शांति: श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए माता से प्रार्थना करते हैं।
- कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन कई परिवारों में कन्या पूजन और भोजन कराने की परंपरा निभाई जाती है।
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा विधि
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है। सामान्य पूजा विधि इस प्रकार है:
1. सुबह स्नान और संकल्प लें
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करके व्रत और पूजा का संकल्प लें।
2. पूजा स्थल की सफाई करें
घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। वहां मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और पूजा की आवश्यक सामग्री तैयार रखें।
3. कलश स्थापना करें
परिवार की परंपरा और शुभ मुहूर्त के अनुसार कलश स्थापना करें। कलश स्थापना को नवरात्रि पूजा की महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है।
4. मां दुर्गा को पूजा सामग्री अर्पित करें
माता को लाल फूल, चुनरी, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें। पूजा सामग्री में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार वस्तुएं शामिल करें।
5. दुर्गा चालीसा और व्रत कथा पढ़ें
मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या अपने परिवार में प्रचलित नवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें।
6. आरती करें
पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति तथा मंगल की कामना करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद वितरित कर सकते हैं।
7. अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करें
कई परिवारों में अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है और उन्हें उपहार या दक्षिणा दी जाती है। यह परंपरा देवी शक्ति के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।
नवरात्रि व्रत में क्या खाएं और किन बातों का ध्यान रखें?
नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार फलाहार या अन्य सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
- फल, दूध, दही और मेवे का सेवन किया जा सकता है।
- व्रत में प्रचलित नियमों के अनुसार कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और साबूदाना खाया जाता है।
- सेंधा नमक का उपयोग कई परिवारों में किया जाता है।
- भोजन और पूजा में स्वच्छता का ध्यान रखें।
- अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार उपवास करें और पर्याप्त पानी पिएं। मधुमेह, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
मां दुर्गा की आरती और प्रार्थना
नवरात्रि की पूजा के दौरान मां दुर्गा की प्रचलित आरती गाई जाती है। भक्त माता के सामने दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करते हैं और अपने परिवार के मंगल की प्रार्थना करते हैं।
जय माता दी!
मां दुर्गा सभी के जीवन में सुख, शांति, साहस और सद्बुद्धि प्रदान करें। भक्तों की यही कामना रहती है कि माता रानी की कृपा से परिवार में खुशहाली बनी रहे और सभी को कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिले।

