क्यों निकाली जाती है भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा? जानिए इससे जुड़े रहस्य, परंपराएं और धार्मिक महत्व
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत के सबसे भव्य और प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह पावन यात्रा ओडिशा के पुरी से शुरू होती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा भव्य और सुसज्जित रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। इस आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और रथों की रस्सी खींचने को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। आइए जानते हैं भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़े प्रमुख धार्मिक तथ्य, मान्यताएं और विशेष परंपराएं।
क्यों निकाली जाती है भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। हर वर्ष भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर जाने के लिए रथ यात्रा करते हैं। वे वहां सात दिन तक विराजमान रहते हैं और इसके बाद पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। वापसी की इस यात्रा को बहुदा यात्रा कहा जाता है।
तीनों देवताओं के रथ हैं अलग-अलग
रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों में विराजमान होते हैं। प्रत्येक रथ का नाम, रंग और स्वरूप अलग होता है।
- भगवान जगन्नाथ का रथ – नंदीघोष (16 पहिए)
- भगवान बलभद्र का रथ – तालध्वज (14 पहिए)
- देवी सुभद्रा का रथ – दर्पदलन (12 पहिए)
हर वर्ष इन रथों का निर्माण नई लकड़ी से किया जाता है। परंपरा के अनुसार पुराने रथों का दोबारा उपयोग नहीं किया जाता।
रथ की रस्सी खींचना क्यों माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसा करने से जीवन के पापों का क्षय होता है और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि लाखों भक्त इस सेवा का अवसर पाने के लिए उत्सुक रहते हैं।
राजा भी करते हैं भगवान की सेवा
रथ यात्रा की सबसे अनोखी परंपराओं में से एक 'छेरा पहंरा' है। इस रस्म में पुरी के गजपति महाराज स्वयं सोने की झाड़ू से रथ के आसपास सफाई करते हैं। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के सामने सभी समान हैं और उनके चरणों में राजा तथा प्रजा का कोई भेद नहीं होता।
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में रथ यात्रा को मोक्षदायिनी यात्रा माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने, रथ यात्रा में शामिल होने या श्रद्धा से भगवान का स्मरण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह यात्रा प्रेम, सेवा, समानता और भक्ति का संदेश भी देती है।
रथ यात्रा से जुड़े रोचक तथ्य
- भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा विश्व की सबसे प्राचीन और विशाल रथ यात्राओं में गिनी जाती है।
- इस आयोजन में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी पुरी पहुंचते हैं।
- रथ यात्रा के दौरान भगवान के दर्शन के लिए किसी जाति, वर्ग या समुदाय का भेद नहीं होता, हर श्रद्धालु को समान अवसर मिलता है।
- भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की परंपरा कई सदियों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और भव्यता के साथ निभाई जाती है।

