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पितृ पक्ष में बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से क्यों करते हैं परहेज? जानें क्या कहते हैं धार्मिक नियम

पितृ पक्ष में बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से क्यों करते हैं परहेज? जानें क्या कहते हैं धार्मिक नियम

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह अवधि पूर्वजों को समर्पित होती है और इस दौरान परिवार के लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति तथा उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में कुछ विशेष नियमों का पालन करने की परंपरा है। इन्हीं नियमों में बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से परहेज करना भी शामिल है।

मान्यता है कि श्राद्ध कर्म के दौरान व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए। इस अवधि में खान-पान से लेकर व्यक्तिगत दिनचर्या तक कई बातों का ध्यान रखने की परंपरा रही है। माना जाता है कि श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को संयमित रहकर पूजा-पाठ और पितरों के स्मरण में समय देना चाहिए।

श्राद्ध के दौरान बाल कटवाने से क्यों बचते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान बाल कटवाना शुभ नहीं माना जाता। विशेष रूप से जिस दिन किसी व्यक्ति के परिवार में श्राद्ध की मुख्य तिथि हो, उस दिन बाल कटवाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे मान्यता है कि श्राद्ध का दिन सांसारिक साज-सज्जा के बजाय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक कर्मों के लिए समर्पित होना चाहिए।

दाढ़ी बनाने को लेकर क्या है मान्यता?

पितृ पक्ष में दाढ़ी और मूंछ बनाने से भी बचने की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है। मान्यता है कि श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति को इस दौरान सादगी और संयम का पालन करना चाहिए। इसलिए श्राद्ध की तिथि पर विशेष रूप से शेविंग या अन्य तरह की व्यक्तिगत सज्जा से दूरी बनाए रखने की परंपरा है।

नाखून काटने से भी करते हैं परहेज

धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान नाखून काटने को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही गई है। खासकर श्राद्ध के दिन नाखून काटने से बचने की परंपरा है। इसका उद्देश्य इस अवधि में व्यक्ति को बाहरी सज्जा के बजाय धार्मिक अनुष्ठान और पूर्वजों के स्मरण पर केंद्रित रखना माना जाता है।

मुख्य श्राद्ध तिथि पर रखें विशेष ध्यान

पितृ पक्ष में प्रत्येक परिवार के लिए अपने पूर्वज की श्राद्ध तिथि विशेष महत्व रखती है। मान्यता के अनुसार, जिस तिथि पर श्राद्ध कर्म किया जाना हो, उस दिन नियमों का अधिक सावधानी से पालन करना चाहिए। इस दौरान तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान जैसे कर्म श्रद्धापूर्वक किए जाते हैं।

क्या वैज्ञानिक कारण भी है?

बाल, दाढ़ी और नाखून न काटने से जुड़े ये नियम मुख्य रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके पीछे कोई निश्चित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पितृ पक्ष से जुड़े नियमों में अंतर भी देखने को मिलता है। इसलिए इन्हें धार्मिक परंपरा और आस्था के संदर्भ में समझना उचित है।

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