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इन मूलांक वालों की लव लाइफ में क्यों रहती हैं सबसे ज्यादा उलझनें? राहु-केतु और शनि का माना जाता है प्रभाव

इन मूलांक वालों की लव लाइफ में क्यों रहती हैं सबसे ज्यादा उलझनें? राहु-केतु और शनि का माना जाता है प्रभाव

न्यूमरोलॉजी (अंक ज्योतिष) के अनुसार, व्यक्ति की जन्म तारीख उसके स्वभाव, व्यक्तित्व और रिश्तों पर गहरा प्रभाव डालती है। कुछ मूलांक ऐसे माने जाते हैं, जिनके जातकों की लव लाइफ या वैवाहिक संबंधों में बार-बार उतार-चढ़ाव, गलतफहमियां और भावनात्मक चुनौतियां देखने को मिल सकती हैं। अंक ज्योतिष में इसके पीछे राहु, केतु और शनि के प्रभाव को महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि यह प्रभाव हर व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

मूलांक 4: राहु का प्रभाव

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 4 होता है। अंक ज्योतिष में इस मूलांक का संबंध राहु से माना जाता है।

  • रिश्तों में अचानक उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
  • गलतफहमियां और संचार की कमी संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
  • प्रेम संबंधों में स्थिरता बनाए रखने के लिए धैर्य और विश्वास जरूरी होता है।
  • जल्दबाजी में लिए गए फैसले बाद में परेशानी का कारण बन सकते हैं।

मूलांक 7: केतु का प्रभाव

7, 16 और 25 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 7 होता है, जिसका संबंध केतु से माना जाता है।

  • ये लोग भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते।
  • कई बार अकेलापन पसंद करने की प्रवृत्ति रिश्तों में दूरी पैदा कर सकती है।
  • जीवनसाथी या पार्टनर इन्हें समझने में कठिनाई महसूस कर सकता है।
  • संवाद बढ़ाने से रिश्ते बेहतर हो सकते हैं।

मूलांक 8: शनि का प्रभाव

8, 17 और 26 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 8 होता है। अंक ज्योतिष में यह शनि ग्रह से जुड़ा माना जाता है।

  • रिश्तों में जिम्मेदारियां अधिक रहती हैं।
  • प्रेम संबंधों में सफलता मिलने में समय लग सकता है।
  • कई बार गलतफहमियों या परिस्थितियों के कारण संबंधों की परीक्षा होती है।
  • धैर्य, ईमानदारी और भरोसा रिश्तों को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

क्या कहते हैं अंक ज्योतिष के जानकार?

अंक ज्योतिष के अनुसार, राहु, केतु और शनि से जुड़े मूलांक वाले लोगों को रिश्तों में जल्दबाजी, अहंकार और संवाद की कमी से बचना चाहिए। विश्वास, धैर्य और पारदर्शिता अपनाने से अधिकांश समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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