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सनातन धर्म में पूजा के दौरान देवी-देवताओं को कौन-से फल-फूल नहीं चढ़ाने चाहिए? जानिए शास्त्रीय नियम

सनातन धर्म में पूजा के दौरान देवी-देवताओं को कौन-से फल-फूल नहीं चढ़ाने चाहिए? जानिए शास्त्रीय नियम

सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान देवी-देवताओं को फूल और फल अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी है। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक अर्पित किए गए पुष्प और फल भगवान को प्रसन्न करते हैं। लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसे फूल और फल भी बताए गए हैं, जिन्हें विशेष देवी-देवताओं को अर्पित करना वर्जित माना गया है। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इसके पीछे कई कारणों का उल्लेख मिलता है।

भगवान शिव को नहीं चढ़ाए जाते ये फूल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। शिव पुराण में इसका उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने भगवान शिव के सामने झूठी गवाही देने के लिए केतकी के फूल का सहारा लिया था। इससे नाराज होकर भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा में निषिद्ध कर दिया।

इसके अलावा शिव जी को तुलसी दल भी नहीं चढ़ाया जाता। मान्यता है कि तुलसी माता का संबंध भगवान विष्णु से माना गया है, इसलिए शिव पूजा में इसका प्रयोग वर्जित बताया गया है।

भगवान विष्णु को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?

भगवान विष्णु की पूजा में अक्षत, तुलसी और पीले पुष्प अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। लेकिन शास्त्रों में विष्णु भगवान को आक और धतूरा अर्पित करने की मनाही बताई गई है। ये वस्तुएं मुख्य रूप से भगवान शिव को प्रिय मानी जाती हैं।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार भगवान विष्णु को बासी फूल या कटे-फटे फल भी अर्पित नहीं करने चाहिए। पूजा में हमेशा ताजे और स्वच्छ फल-फूल का उपयोग करना शुभ माना जाता है।

माता लक्ष्मी को नहीं पसंद ये चीजें

मां लक्ष्मी को साफ-सफाई और सुगंध अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इसलिए उन्हें सूखे, मुरझाए या कांटेदार फूल अर्पित नहीं करने चाहिए। कई धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी को तुलसी दल अर्पित न करने की बात भी कही गई है, क्योंकि तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है।

इसके अलावा खंडित या सड़े हुए फल भी देवी-देवताओं को चढ़ाना अशुभ माना गया है।

गणेश जी को तुलसी चढ़ाना क्यों माना जाता है वर्जित?

धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार तुलसी माता ने भगवान गणेश से विवाह की इच्छा जताई थी, लेकिन गणेश जी ने मना कर दिया। इससे क्रोधित होकर तुलसी ने उन्हें श्राप दिया। तभी से गणेश जी की पूजा में तुलसी अर्पित नहीं की जाती।

हालांकि गणेश चतुर्थी जैसे कुछ विशेष अवसरों पर कुछ परंपराओं में इसका अलग उल्लेख मिलता है, लेकिन सामान्य पूजा में तुलसी चढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है।

पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

  • हमेशा ताजे और सुगंधित फूलों का प्रयोग करें।
  • टूटे, गिरे हुए या मुरझाए फूल अर्पित न करें।
  • पूजा में साफ और शुद्ध फलों का ही उपयोग करें।
  • देवी-देवताओं की पूजा से जुड़े शास्त्रीय नियमों का पालन करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाती है। इसलिए पूजा सामग्री का चयन करते समय शास्त्रीय नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है।

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