कार्तिक मास हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने की विशेष परंपरा है। कार्तिक मास में सुबह सूर्योदय से पहले स्नान, शाम के समय दीपदान, तुलसी पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, छठ पूजा, देवउठनी एकादशी और देव दीपावली जैसे कई प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं।
उत्तर भारत की पूर्णिमांत पंचांग परंपरा के अनुसार, साल 2026 में कार्तिक मास 27 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा।
कार्तिक मास में कौन-कौन से व्रत और त्योहार पड़ेंगे?
कार्तिक मास में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की तारीखें यहां देख सकते हैं।
नोट: कुछ पर्वों की तिथियों में स्थानीय पंचांग और उदयातिथि के अनुसार अंतर हो सकता है।
29
अक्टूबर
करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी
सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से करवा चौथ का व्रत रखेंगी। इसी दिन वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी है।
1
नवंबर
अहोई अष्टमी
संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से महिलाएं यह व्रत रखती हैं।
5
नवंबर
रमा एकादशी और गोवत्स द्वादशी
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी व्रत का महत्व है। कुछ परंपराओं में गोवत्स द्वादशी भी मनाई जाती है।
6
नवंबर
धनतेरस और धन्वंतरि जयंती
इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लोग परंपरा के अनुसार बर्तन, सोना-चांदी या अन्य शुभ वस्तुएं खरीदते हैं।
7–8
नवंबर
नरक चतुर्दशी और दीपावली
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इसके बाद दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा, दीप प्रज्वलन और घरों की सजावट की जाती है।
9–11
नवंबर
गोवर्धन पूजा और भाई दूज
गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और अन्नकूट का आयोजन होता है। भाई दूज पर बहनें भाइयों के सुखी जीवन की कामना करती हैं।
13–15
नवंबर
छठ पूजा
छठ पर्व में सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना की जाती है। व्रती अस्त होते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
17–18
नवंबर
गोपाष्टमी और अक्षय नवमी
गोपाष्टमी पर गौ-पूजा की जाती है। अक्षय नवमी को आंवले के वृक्ष की पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है।
20–21
नवंबर
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह
धार्मिक मान्यता है कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। इस अवसर पर तुलसी और शालिग्राम विवाह की परंपरा भी निभाई जाती है।
24
नवंबर
कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है। वाराणसी सहित कई स्थानों पर देव दीपावली मनाई जाती है।
त्योहारों की तारीखों के लिए पंचांग स्रोत:
कार्तिक स्नान का क्या है महत्व?
कार्तिक मास में कार्तिक स्नान की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में सूर्योदय से पहले स्नान करने, भगवान विष्णु का स्मरण करने और दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालु पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करते हैं, जबकि अन्य लोग घर पर ही स्नान के बाद पूजा-अर्चना करते हैं।
कार्तिक स्नान के दौरान इन बातों का ध्यान रखा जाता है:
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सुबह जल्दी उठकर स्नान करना।
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स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करना।
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भगवान विष्णु का स्मरण और मंत्र-जप करना।
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जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना।
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पूरे महीने सात्विक दिनचर्या और अच्छे आचरण का पालन करना।
धार्मिक परंपरा में कार्तिक स्नान केवल शारीरिक शुद्धता नहीं, बल्कि मन की शांति, संयम और आध्यात्मिक साधना से भी जुड़ा है।
कार्तिक मास में दीपदान और तुलसी पूजा क्यों है खास?
कार्तिक मास में शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने और मंदिर में दीपदान करने की परंपरा है। मान्यता है कि दीपदान से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का भाव बना रहता है। इस महीने में भगवान विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा और तुलसी आराधना भी विशेष महत्व रखती है।
श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार प्रतिदिन दीपक जला सकते हैं, धार्मिक ग्रंथों का पाठ कर सकते हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकते हैं।
कार्तिक मास में क्या करना चाहिए?
कार्तिक मास में नियमित पूजा-पाठ, स्नान, दीपदान, तुलसी सेवा और दान-पुण्य को शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत-विधि अपनाएं। यदि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, तो कठिन उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
कार्तिक मास का मुख्य संदेश आस्था, संयम, सेवा और सदाचार से जुड़ा है। इस दौरान पड़ने वाले व्रत-त्योहार परिवार के साथ धार्मिक परंपराओं को निभाने और जरूरतमंदों की सहायता करने का अवसर भी देते हैं।

