Samachar Nama
×

शरद पूर्णिमा पर कब निकलेगा चांद? सही टाइम देखकर छत पर रखें खीर की कटोरी
 

शरद पूर्णिमा पर कब निकलेगा चांद? सही टाइम देखकर छत पर रखें खीर की कटोरी

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का खास महत्व होता है। वहीं आश्विन माह की पूर्णिमा सबसे पवित्र और खास मानी जाती है। इसे शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। इस खास दिन चंद्रमा की पूजा के साथ मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही चांद की खुली रोशनी में खीर रखने की परंपरा होती है। इसी वजह से लोग शरद पूर्णिमा पर चांद के निकलने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। तो चलिए चलिए जानते हैं कि 25 अक्टूबर को चंद्रोदय का समय क्या है और कितने बजे खीर की कटोरी चांदी की रोशनी के नीचे रखी जाए? साथ ही जानें मां लक्ष्मी की पूजा का सही समय क्या है?

शरद पूर्णिमा की तिथि और सही समय

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्टूबर की सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर हो जाएगी। वहीं तिथि का समापन अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को है। तिथि के समापन की तिथि सुबह 9 बजकर 41 मिनट है। ऐसे में शरद पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर को मानी जाएगी। 25 अक्टूबर की ही शाम चंद्रमा को अर्घ्य दें और मां लक्ष्मी की पूजा करें। साथ ही इसी रात चांद की रोशनी में खीर रखें।

चांद निकलने का सही समय

पंचांग के हिसाब से 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा के निकलने का समय शाम में 5 बजे के आसपास है। दिल्ली में इसी समय के आसपास चंद्रोदय का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं दूसरी जगहों पर रहने वाले लोग अपने स्थानीय पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय का समय देख सकते हैं। शहर के हिसाब चंद्रोदय का समय अलग-अलग हो सकता है।

छत पर खीर की कटोरी कितने बजे रखें?

शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। माना जाता है कि रात भर चंद्रमा की रोशनी के नीचे रखा हुआ खीर अमृत जैसा हो जाता है। इस सवाल को लेकर कई लोग कन्फ्यूज होते हैं कि रात में खीर चंद्रमा की रोशनी में बाहर कब रखें? नियम के अनुसार चंद्रमा के निकलने के कुछ देर बाद खीर की कटोरी को बाहर रखा जा सकता है।

वहीं ऐसा भी मानते हैं कि रात में 9 बजे के आसपास चंद्रमा की किरणों का असर सबसे तेज होता है तो इसके बाद भी आप कटोरी को बाहर खुले आसमान के नीचे रख सकते हैं। ध्यान रखें कि कटोरी वहीं हो जहां पर रोशनी अच्छे से आती है। कटोरी को किसी जालीदार ढक्कन से ढक दें। इस खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

मां लक्ष्मी की पूजा का सही समय

शरद पूर्णिमा पर विशेष रूप से मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। निशिता काल में मां लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। 25 अक्टूबर को निशिता काल रात में 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहने वाला है। इसी मुहूर्त में आप लक्ष्मी मां की पूजा कर लें।

Share this story

Tags