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कब रखा जाएगा जितिया व्रत, महाभारत काल से चला आ रहा है व्रत, पढें किसकी होती है पूजा
 

कब रखा जाएगा जितिया व्रत, महाभारत काल से चला आ रहा है व्रत, पढें किसकी होती है पूजा

जितिया व्रत यानी जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। खासतौर पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और उनके जीवन में आने वाली परेशानियों से रक्षा की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं। यह व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

जितिया व्रत कब रखा जाएगा

पंचांग के अनुसार जितिया व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इससे पहले सप्तमी तिथि से व्रत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कई क्षेत्रों में इस पर्व को तीन दिनों तक चलने वाली परंपरा के रूप में मनाया जाता है, जिसमें नहाय-खाय, निर्जला व्रत और पारण की अलग-अलग परंपराएं हैं। तिथि और पारण के समय में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।

किसकी होती है पूजा

जितिया व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ भगवान विष्णु के अवतारों से जुड़ी मान्यताओं का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन इस व्रत की प्रमुख पूजा भगवान जीमूतवाहन की मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जीमूतवाहन ने एक नाग की संतान की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान देने का संकल्प लिया था। इसी कारण उन्हें त्याग, करुणा और संतान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

व्रत से जुड़ी महाभारत काल की मान्यता

जितिया व्रत की कथा का संबंध महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश को समाप्त करने के उद्देश्य से अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से गर्भ में पल रहे परीक्षित की रक्षा की। इसी वजह से यह व्रत संतान की रक्षा और दीर्घायु की कामना से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है।

क्यों रखा जाता है जितिया व्रत

मान्यता है कि जितिया व्रत रखने से संतान पर भगवान की कृपा बनी रहती है और उसकी आयु लंबी होती है। माताएं अपनी संतान के स्वस्थ, सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना करती हैं। इस दौरान कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और व्रत के नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करती हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जितिया व्रत से जुड़ी कथाएं और मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी पूजा विधि, कथा और तिथि के पालन में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार तिथि, पूजा और पारण का समय जरूर देखना चाहिए

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