साल 2026 में कब मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और आधी रात को उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि साल 2026 में जन्माष्टमी कब है, तो यहां जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और सरल पूजा विधि।
साल 2026 में कब है कृष्ण जन्माष्टमी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के आधार पर वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 3 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा निशीथ काल (मध्यरात्रि) में करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था।
- पर्व: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
- तिथि: 3 सितंबर 2026, गुरुवार
- पूजा का श्रेष्ठ समय: निशीथ काल (मध्यरात्रि)
- विशेष महत्व: अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने पर पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
नोट: स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
जन्माष्टमी पूजा की आसान विधि
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर की साफ-सफाई कर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या बाल गोपाल को स्थापित करें।
- भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं।
- नए वस्त्र, मोरपंख, मुकुट और फूलों से उनका श्रृंगार करें।
- माखन, मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
- श्रीकृष्ण जन्म कथा और भगवद्गीता का पाठ करें।
- मध्यरात्रि में आरती कर भगवान का जन्मोत्सव मनाएं और प्रसाद वितरित करें।
जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- व्रत के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करें।
- पूजा में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
- भगवान श्रीकृष्ण को माखन, मिश्री और धनिया की पंजीरी का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
- पूजा के समय मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ आराधना करें।

