जून 2026 में मृत्यु पंचक कब है? जानें तिथि, महत्व और इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए
वैदिक ज्योतिष में पंचक का विशेष महत्व बताया गया है। जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध से लेकर रेवती नक्षत्र तक भ्रमण करता है, तब पंचक काल माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में वार के अनुसार पंचक के अलग-अलग नाम और प्रभाव बताए गए हैं। इनमें मृत्यु पंचक को सबसे अधिक संवेदनशील और कष्टकारी माना जाता है।
माना जाता है कि मृत्यु पंचक के दौरान कुछ शुभ और महत्वपूर्ण कार्यों से बचना चाहिए। इसलिए लोग इसकी तिथियों की जानकारी पहले से जानना चाहते हैं।
क्या होता है मृत्यु पंचक?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जब पंचक काल रविवार से प्रारंभ होता है, तो उसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। यह पंचक अशुभ माना जाता है और इस दौरान नए एवं मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में किए गए कुछ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।
जून 2026 में मृत्यु पंचक कब रहेगा?
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार जून 2026 में पंचक की तिथियां पंचांग के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ मिनटों का अंतर रख सकती हैं। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान ज्योतिषाचार्य से समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।
मृत्यु पंचक में क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान निम्न कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है—
- गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य।
- विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्यक्रम।
- नए व्यवसाय या बड़े निवेश की शुरुआत।
- मकान निर्माण का शुभारंभ।
- महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार।
हालांकि दैनिक पूजा-पाठ, जप, दान और नियमित कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।
मृत्यु पंचक में क्या करें?
- भगवान की आराधना करें।
- महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
- जरूरतमंदों को दान दें।
- सकारात्मक विचार रखें।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
पंचक का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में पंचक को सावधानी बरतने का समय माना गया है। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की कुंडली, ग्रह स्थिति और कार्य की प्रकृति पर भी निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना लाभकारी माना जाता है।

