Samachar Nama
×

17 या 18 सितंबर कब है राधा अष्टमी? यहां पढ़ें राधा रानी के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा
 

17 या 18 सितंबर कब है राधा अष्टमी? यहां पढ़ें राधा रानी के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा

राधा अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हर साल यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। इस बार राधा अष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच 17 और 18 सितंबर को लेकर भ्रम देखने को मिल रहा है। हालांकि पंचांग गणना के अनुसार 2026 में राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजकर 2 मिनट से शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर करीब 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 19 सितंबर को राधा अष्टमी का व्रत और पूजन किया जाएगा।

राधा अष्टमी के दिन राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ब्रज क्षेत्र, खासकर बरसाना और वृंदावन में इस पर्व की विशेष धूम रहती है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार किया जाता है और राधा रानी के जन्मोत्सव से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ राधा-कृष्ण का पूजन करने से जीवन में सुख, शांति और प्रेम की प्राप्ति होती है।

राधा रानी के जन्म को लेकर पुराणों और ब्रज की धार्मिक परंपराओं में कई कथाएं प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार राधा जी का जन्म बरसाना क्षेत्र में वृषभानु जी और माता कीर्ति के घर हुआ था। कहा जाता है कि राधा रानी सामान्य बालिका की तरह जन्म के बाद तुरंत आंखें नहीं खोल रही थीं। उनके माता-पिता सहित पूरा परिवार उनके जन्म से बेहद प्रसन्न था।

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार नंद बाबा और यशोदा माता बालिका राधा को देखने के लिए वृषभानु जी के घर पहुंचे। उस समय बाल कृष्ण भी उनके साथ थे। मान्यता है कि जैसे ही बाल कृष्ण राधा रानी के पास पहुंचे, उन्होंने पहली बार अपनी आंखें खोलीं। भक्त इसे राधा और कृष्ण के दिव्य संबंध का प्रतीक मानते हैं।

एक अन्य धार्मिक मान्यता में कहा जाता है कि राधा रानी का प्राकट्य सांसारिक जन्म से अलग दिव्य स्वरूप में हुआ था। ब्रज की भक्ति परंपरा में उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति और प्रेम का स्वरूप माना जाता है। इसी वजह से राधा अष्टमी को केवल जन्मोत्सव ही नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति के पर्व के रूप में भी देखा जाता है।

राधा अष्टमी के दिन भक्त सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन किया जाता है। कई स्थानों पर मध्याह्न के समय राधा रानी का विशेष अभिषेक और श्रृंगार किया जाता है। धार्मिक पंचांगों में भी राधा रानी की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन राधा रानी का स्मरण करने, राधा-कृष्ण के नाम का जाप करने और भजन-कीर्तन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। हालांकि व्रत और पूजा की विधि अलग-अलग परंपराओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकती है।

Share this story

Tags