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जन्माष्टमी 2026 कब है: जानें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

जन्माष्टमी 2026 कब है: जानें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

हर साल जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों और घरों में विशेष सजावट की जाती है। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है और पंचामृत से उनका अभिषेक किया जाता है।

जन्माष्टमी 2026 कब मनाई जाएगी?

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे। जन्माष्टमी की तिथि और पूजा का शुभ समय अलग-अलग स्थानों के पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है।

जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी की पूजा के लिए मध्य रात्रि का समय सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात 12 बजे हुआ था। इस दौरान भक्त भगवान कृष्ण की प्रतिमा को नए वस्त्र पहनाते हैं, झूला सजाते हैं और जन्मोत्सव मनाते हैं।

जन्माष्टमी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण से परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

जन्माष्टमी पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
  • रात में 12 बजे कृष्ण जन्म के समय पूजा करें।
  • भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं।
  • माखन-मिश्री सहित प्रिय चीजों का भोग लगाएं।
  • आरती और मंत्र जाप के बाद प्रसाद बांटें।

जन्माष्टमी पर करें ये शुभ कार्य

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और गायों की सेवा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

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