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Amavasya Kab Hai: 14 या 15 जून? जानें जून की सोमवती अमावस्या की सही तिथि और महत्व

Amavasya Kab Hai: 14 या 15 जून? जानें जून की सोमवती अमावस्या की सही तिथि और महत्व

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विधान है। जून माह की अमावस्या को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई लोग 14 जून को अमावस्या मान रहे हैं, जबकि पंचांग के अनुसार इस बार सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी।

15 जून को है सोमवती अमावस्या

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस बार यह शुभ संयोग 15 जून को बन रहा है। इसलिए धार्मिक दृष्टि से अमावस्या के व्रत, स्नान, तर्पण और दान-पुण्य का महत्व 15 जून को माना जाएगा।

क्यों है सोमवती अमावस्या खास?

सोमवती अमावस्या का संबंध भगवान शिव और पितरों दोनों से माना जाता है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है, जबकि अमावस्या तिथि पितरों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में इस दिन शिव पूजा, पितृ तर्पण और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होने की मान्यता है।

पितरों के निमित्त किए जाते हैं ये कार्य

अमावस्या के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों का तर्पण करते हैं। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

भगवान शिव की पूजा से मिलता है शुभ फल

सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना का भी विधान है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पंचांग के अनुसार रखें सही तिथि का ध्यान

धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत-पूजन के लिए सही तिथि का विशेष महत्व होता है। ऐसे में पंचांग के अनुसार जून माह की सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। इसलिए पूजा-पाठ, तर्पण और दान-पुण्य जैसे कार्य इसी दिन करना अधिक शुभ माना गया है।

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