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Janmashtami व्रत में क्या करें और क्या नहीं? जानिए सप्तमी तिथि से लागू होने वाले जरूरी नियम

Janmashtami व्रत में क्या करें और क्या नहीं? जानिए सप्तमी तिथि से लागू होने वाले जरूरी नियम

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर देशभर में उत्साह रहता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की विधि-विधान से पूजा करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। आचार्य मदन मोहन के अनुसार, अगर आप पहली बार जन्माष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो इसकी तैयारी एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि से ही शुरू कर देनी चाहिए।

सप्तमी से ही इन चीजों से करें परहेज

आचार्य मदन मोहन के अनुसार, जन्माष्टमी व्रत की तैयारी सप्तमी से शुरू मानी जाती है। इस दिन से भोजन और दिनचर्या को सात्विक रखने की कोशिश करनी चाहिए।

सप्तमी से लहसुन-प्याज, मांसाहार और मदिरा का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करने और सात्विक विचार रखने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्तमी के दिन बैंगन और मूली जैसी कुछ सब्जियों से भी परहेज किया जाता है।

सुबह संकल्प लेकर शुरू करें व्रत

जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

दिनभर भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप और उनका स्मरण किया जा सकता है। इस दौरान मन को शांत रखने और सात्विक विचारों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। शाम के समय भी स्नान करना शुभ माना जाता है।

व्रत में कर सकते हैं फलाहार

जो लोग निर्जला व्रत नहीं रखते, वे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। व्रत के दौरान केला, सेब, अनार, दही, कुट्टू और साबूदाना जैसे फलाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत में अन्न का सेवन करने से बचना चाहिए। भोजन में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन चीजों से भी दूरी रखने की सलाह

आचार्य के अनुसार, जन्माष्टमी व्रत के दौरान खान-पान को लेकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। रिफाइंड शुगर और रिफाइंड तेल के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है। इनके स्थान पर गुड़, शहद और घी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा जन्माष्टमी व्रत में लौकी, मूली, गाजर और चुकंदर जैसी सब्जियों से भी परहेज करने की बात कही गई है। लहसुन-प्याज, मांसाहार और शराब से पूरी तरह दूरी रखने की सलाह दी जाती है।

निर्जला व्रत रखने वाले इन बातों का रखें ध्यान

कुछ श्रद्धालु जन्माष्टमी पर निर्जला व्रत रखते हैं। निर्जला व्रत में पानी समेत किसी भी तरह के भोजन या पेय का सेवन नहीं किया जाता।

आचार्य के अनुसार, भगवान कृष्ण के मध्यरात्रि जन्म के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। इसे अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही करना चाहिए। किसी बीमारी, कमजोरी, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

जन्माष्टमी व्रत के दौरान ध्यान रखें

  • सप्तमी से भोजन को सात्विक रखने की कोशिश करें।
  • लहसुन-प्याज, मांसाहार और मदिरा से परहेज करें।
  • जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार करें।
  • व्रत में अन्न का सेवन करने से बचें।
  • निर्जला व्रत अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही रखें।
  • मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के बाद धार्मिक विधि के अनुसार व्रत का पारण करें।

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