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अहोई अष्टमी पर तारे कितने बजे निकलेंगे, जानें कैसे करें पूजा, अर्घ्य कैसे दें

अहोई अष्टमी पर तारे कितने बजे निकलेंगे, जानें कैसे करें पूजा, अर्घ्य कैसे दें

अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जा रहा है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए दिनभर व्रत रखती हैं। सुबह से निर्जला उपवास करने के बाद शाम को अहोई माता की पूजा की जाती है। इसके बाद आसमान में तारों के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और व्रत का पारण किया जाता है।

अहोई अष्टमी पर व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि आज तारे कितने बजे दिखाई देंगे और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है। आइए जानते हैं पूजा की विधि, तारा दर्शन का समय और अर्घ्य देने का तरीका।

अहोई अष्टमी 2026: तारों के दर्शन का समय

अहोई अष्टमी पर तारों को देखकर व्रत खोलने की परंपरा है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और तारों के दिखाई देने का समय अलग हो सकता है।

जयपुर में शाम 6 बजकर 8 मिनट पर तारों के दर्शन का संभावित समय है। वहीं दिल्ली में शाम 6 बजे, लखनऊ में 5:48 बजे, भोपाल में 6:05 बजे, कोलकाता में 5:22 बजे और चंडीगढ़ में शाम 6 बजे तारे दिखाई देने का अनुमान है।

ये समय अनुमानित हैं। मौसम, बादल और स्थानीय परिस्थितियों के कारण तारों के दर्शन में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 1 नवंबर को अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ समय शाम 5:44 बजे से 7:01 बजे तक जयपुर में रहेगा। पूजा मुहूर्त की अवधि 1 घंटा 17 मिनट है।

अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू हो चुकी है और 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे समाप्त होगी।

अहोई अष्टमी पर कैसे करें पूजा?

  1. सुबह स्नान करने के बाद अहोई अष्टमी व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा स्थल को साफ करके दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं या उनकी तस्वीर स्थापित करें।

  3. माता के सामने दीपक जलाएं और रोली, अक्षत, फूल, फल तथा मिठाई अर्पित करें।

  4. अहोई माता को जल अर्पित करके संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

  5. शाम को परिवार के साथ अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनें।

  6. इसके बाद माता की आरती करें और तारों के निकलने का इंतजार करें।

तारों को अर्घ्य कैसे दें?

शाम को तारे दिखाई देने पर एक लोटे में साफ जल भरें। कुछ परिवारों में जल में थोड़ा दूध मिलाने की भी परंपरा है। इसके बाद तारों की ओर मुख करके संतान की खुशहाली और लंबी उम्र की कामना करें।

अब लोटे से धीरे-धीरे जल अर्पित करते हुए तारों को अर्घ्य दें। इसके बाद अहोई माता का स्मरण करें और परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें। फिर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें। कई घरों में संतान के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलने की परंपरा भी है।

अगर बादलों के कारण तारे दिखाई न दें तो क्या करें?

कई बार मौसम खराब होने या आसमान में बादल छाए रहने के कारण निर्धारित समय पर तारे दिखाई नहीं देते। ऐसी स्थिति में पहले कुछ देर आसमान साफ होने का इंतजार किया जा सकता है। यदि तारे फिर भी दिखाई न दें तो कुछ परिवार निर्धारित समय पर तारों का स्मरण करके अर्घ्य देने की परंपरा अपनाते हैं। इसके लिए जल से भरा लोटा लेकर आसमान की ओर मुख करके अहोई माता का ध्यान करते हुए संतान की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।

हालांकि, यह तरीका सभी परिवारों में समान रूप से प्रचलित नहीं है। इसलिए ऐसी स्थिति में अपने घर की परंपरा या कुल पुरोहित की सलाह के अनुसार निर्णय लेना उचित रहेगा।

अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन अहोई माता की पूजा और व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व माना गया है। उत्तर भारत में यह व्रत विशेष रूप से श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

डिस्क्लेमर: लेख में दी गई पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा तथा व्रत खोलने की विधि में अंतर हो सकता है।

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