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नवरात्रि में हवन के बाद क्या करना चाहिए? जानें पूर्णाहुति से लेकर प्रसाद तक 5 जरूरी नियम
 

नवरात्रि में हवन के बाद क्या करना चाहिए? जानें पूर्णाहुति से लेकर प्रसाद तक 5 जरूरी नियम

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ हवन करने का विशेष महत्व माना जाता है। अष्टमी और महानवमी के दिन कई परिवार हवन, पूर्णाहुति और कन्या पूजन के साथ नवरात्रि की पूजा संपन्न करते हैं। लेकिन हवन पूरा होने के बाद क्या करना चाहिए, प्रसाद कब बांटना चाहिए और हवन की राख का क्या करना चाहिए? इन बातों को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहते हैं। आइए जानते हैं हवन के बाद अपनाई जाने वाली 5 जरूरी बातें।

1. हवन के बाद विधि-विधान से पूर्णाहुति करें

हवन की समाप्ति पर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूर्णाहुति दी जाती है। इसमें हवन सामग्री और घी की थोड़ी मात्रा अग्नि में अर्पित की जाती है। इस दौरान मां दुर्गा का स्मरण करके परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।

ध्यान रखें कि पूर्णाहुति की सामग्री और मंत्र अलग-अलग पूजा परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। विशेष वैदिक अनुष्ठान के लिए पुरोहित से मार्गदर्शन लेना उचित रहता है।

2. मां दुर्गा की आरती करें

पूर्णाहुति के बाद मां दुर्गा की आरती करने की परंपरा है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती कर सकते हैं और देवी से सुख, समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर सकते हैं। आरती के दौरान दीपक को सावधानी से पकड़ें और उसे पर्दों या दूसरी ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।

3. कन्या पूजन और भोजन कराएं

नवरात्रि की अष्टमी या महानवमी पर कई परिवार कन्या पूजन करते हैं। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है। हलवा, पूरी और चने का प्रसाद कई घरों में बनाया जाता है।

कन्या पूजन हवन से पहले करना है या बाद में, इसका क्रम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। दोनों विधियां प्रचलित हैं।

4. प्रसाद सभी में बांटें

पूजा और आरती के बाद मां दुर्गा को चढ़ाया गया भोग श्रद्धापूर्वक प्रसाद के रूप में बांटा जा सकता है। प्रसाद परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और अन्य लोगों को भी दिया जा सकता है। भोजन साफ-सुथरे तरीके से तैयार करें और खराब हो चुकी सामग्री का सेवन न करें।

5. हवन की राख और पूजा सामग्री का सही निपटान करें

हवन के बाद बची राख को हटाने से पहले पूरी तरह ठंडा होने दें। राख में गर्म अंगारे होने पर जलने का खतरा रहता है। ठंडी राख को अपनी परंपरा के अनुसार संभाल सकते हैं या उपयुक्त मात्रा में मिट्टी में मिला सकते हैं।

कलश का जल, जौ, फूल और पत्तियों जैसी प्राकृतिक सामग्री को भी सम्मानपूर्वक संभालें। जौ को गमले या बगीचे में लगाया जा सकता है। पूजा सामग्री को प्लास्टिक के साथ नदी या तालाब में न डालें, ताकि जल प्रदूषित न हो।

हवन के बाद इन गलतियों से बचें

  • जलती अग्नि को बिना निगरानी के न छोड़ें।

  • हवन कुंड पूरी तरह ठंडा होने से पहले राख न हटाएं।

  • पूजा सामग्री को सार्वजनिक स्थानों पर न फैलाएं।

  • धार्मिक परंपराओं को लेकर अनावश्यक डर में न पड़ें।

  • अपनी पारिवारिक पूजा विधि और स्थानीय परंपरा का सम्मान करें।

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