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क्या होता है सिक्स्थ सेंस? जानिए कैसे काम करती है इंसान की रहस्यमयी छठी इंद्रिय

क्या होता है सिक्स्थ सेंस? जानिए कैसे काम करती है इंसान की रहस्यमयी छठी इंद्रिय

अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा कि उन्हें किसी अनहोनी का पहले ही आभास हो गया था या किसी खतरे का अंदेशा पहले से महसूस हो रहा था। कई बार ये बातें सच भी साबित हो जाती हैं। इसी रहस्यमयी क्षमता को आम भाषा में “सिक्स्थ सेंस” यानी छठी इंद्रिय कहा जाता है।

माना जाता है कि सिक्स्थ सेंस इंसान को उन संकेतों और परिस्थितियों का एहसास करा देता है, जिन्हें हमारी सामान्य पांच इंद्रियां महसूस नहीं कर पातीं। यही वजह है कि इसे रहस्यमयी और अद्भुत शक्ति के रूप में देखा जाता है।

क्या है सिक्स्थ सेंस?

सामान्य रूप से मनुष्य की पांच इंद्रियां — आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा — बाहरी दुनिया से जुड़ी सूचनाओं को ग्रहण करती हैं। लेकिन सिक्स्थ सेंस को ऐसी आंतरिक चेतना माना जाता है, जो बिना किसी प्रत्यक्ष संकेत के भी किसी घटना, खतरे या परिस्थिति का पूर्वाभास करा सकती है।

कई विशेषज्ञ इसे व्यक्ति की गहरी मानसिक जागरूकता और अवचेतन मन की शक्ति से जोड़कर देखते हैं। वहीं आध्यात्मिक मान्यताओं में इसे प्रकृति की विशेष देन माना गया है।

कैसे काम करता है सिक्स्थ सेंस?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा मस्तिष्क हर पल आसपास की सूचनाओं को ग्रहण करता रहता है। इनमें से कई संकेत ऐसे होते हैं, जिन्हें हम सचेत रूप से समझ नहीं पाते, लेकिन हमारा अवचेतन मन उन्हें रिकॉर्ड कर लेता है।

यही अवचेतन मन कई बार अचानक किसी खतरे या परिस्थिति के प्रति हमें सचेत कर देता है। इसे ही लोग सिक्स्थ सेंस का संकेत मानते हैं।

वहीं आध्यात्मिक दृष्टिकोण में माना जाता है कि जब व्यक्ति का मन शांत और एकाग्र होता है, तब उसकी आंतरिक चेतना अधिक सक्रिय हो जाती है। ऐसे में उसे भविष्य से जुड़े संकेत या ऊर्जा महसूस होने लगती है।

क्या हर इंसान में होती है यह क्षमता?

विशेषज्ञों का मानना है कि सिक्स्थ सेंस हर व्यक्ति में किसी न किसी रूप में मौजूद होता है, लेकिन अधिकांश लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और व्यस्तताओं में इतने उलझे रहते हैं कि इस क्षमता को पहचान नहीं पाते।

ध्यान, मेडिटेशन और आत्मचिंतन जैसी प्रक्रियाओं के जरिए व्यक्ति अपनी आंतरिक चेतना को बेहतर तरीके से समझ सकता है।

विज्ञान क्या कहता है?

विज्ञान सिक्स्थ सेंस को पूरी तरह अलौकिक शक्ति नहीं मानता। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दिमाग की तेज विश्लेषण क्षमता, अनुभव और अवचेतन संकेतों का परिणाम हो सकता है।

हालांकि आज भी सिक्स्थ सेंस को लेकर कई रहस्य बने हुए हैं, जिन पर लगातार शोध किए जा रहे हैं।

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